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मंगलवार, 18 दिसंबर, 2007 को 13:28 GMT तक के समाचार

टाइटलर की भूमिका की जाँच के आदेश

दिल्ली की एक अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगों में भूमिका को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री जगदीश टाइटलर को दी गई सीबीआई की 'क्लीन चिट' को ख़ारिज करते हुए मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं.

अक्तूबर 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और अन्य शहरों में सिख विरोधी दंगे भड़के थे और कांग्रेस के कुछ नेताओं के ख़िलाफ़ इन्हें भड़काने के आरोप लगे थे.

उन दंगों में लगभग तीन हज़ार लोग मारे गए थे.

दंगों के एक प्रभावित जसबीर सिंह का कहना है कि उनके परिवार और रिश्तेदारों में 26 लोग मारे गए थे.

जसबीर सिंह का बयान

उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने 29 सितंबर को अपनी रिपोर्ट में इन आरोपों का सामना कर रहे जगदीश टाइटलर को 'क्लीन चिट' दे दी थी और मामले को बंद करने की सिफ़ारिश की थी.

दंगा पीड़ितों और कुछ सिख संगठनों ने इसके ख़िलाफ़ याचिका दायर की थी जिस पर अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई.

दंगा पीड़ितों के वकील एचएस फुल्का ने मीडिया को बताया, "कोर्ट ने टाइटलर को दी गई सीबीआई की क्लीन चिट को ख़ारिज करते हुए कहा है कि मामले की आगे जाँच होनी चाहिए. सीबीआई को दोबारा जाँच कर रिपोर्ट 16 जनवरी तक पेश करनी है."

जसबीर का बयान

सीबीआई ने टाइटलर को दी गई 'क्लीन चिट' में कहा है कि उन्हें दंगे भड़काते हुए देखने का दावा करने वाले जसबीर सिंह का पता नहीं चल पा रहा है इसलिए आगे जांच नहीं हो सकती.

जसबीर सिंह इस समय अमरीका में रह रहे हैं. सीबीआई की इस रिपोर्ट के बाद जसबीर सिंह कई टीवी चैनलों पर देखे गए जिसके बाद दंगा पीड़ितों ने याचिका दायर कर स्पष्ट किया कि जसबीर सिंह बयान के लिए उपलब्ध हैं.

जसबीर सिंह के वकील नवकिरण सिंह ने बीबीसी को बताया, "जसबीर को भारत आकर अपना बयान दर्ज कराने में ये आपत्ति है कि भारत में उनकी जान को ख़तरा हो सकता है लेकिन अन्य ज़रिए खोजे जा सकते हैं."

वकील नवकिरण का कहना है कि कोर्ट के ताज़ा आदेश के बाद सीबीआई को तय करना है कि जसबीर का बयान लेने का क्या ज़रिए खोजा जा सकता है.

पहले ये कहा गया था कि वे अपना बयान अमरीका में भारतीय दूतावास या न्यूयॉरक में अपने वकील के पास दर्ज करा सकते हैं.

उधर जगदीश टाइटलर ने मीडिया को बताया, "मीडिया बार-बार ये कह रहा है कि जसबीर गवाह हैं. वे गवाह नहीं हैं. आज भी यही कहा गया कि उनका बयान रिकॉर्ड करो."