विनीत खरे
बीबीसी संवाददाता, शिमला से
हिमाचल प्रदेश में बुधवार को दूसरे चरण के लिए मतदान हो रहा है. चुनाव के इस चरण में 65 विधानसभा सीटों के लिए मत डाले जाएंगे.
चुनाव क्या कहिए दो पार्टियों के बीच घमासान है.
भारतीय जनता पार्टी की कमान है प्रेम कुमार धूमल के हाथ और कांग्रेस का मोर्चा संभाला है मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने.
दोनों के अंदाज़ अलग हैं, हमले करने की भाषा भी अलग. और ख़ासकर जिस तरह दोनों नेताओं ने चुनावी प्रचार को अंजाम दिया है, वो उनके पार्टी के रुख़ को स्पष्ट करता है.
भाजपा का निशाना
भारतीय जनता पार्टी का चुनावी प्रचार बेहद आक्रामक है.
उसके नेता चाहे प्रेम कुमार धूमल हों या सुषमा स्वराज, वे मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं.
दूसरी ओर मुख्यमंत्री या राजा साहेब, जिस नाम से लोग मुख्यमंत्री को जानते हैं, अपने कार्यकाल के दौरान हुए विकास के काम के बारे में ज्यादा बात करते हैं.
वो कहते हैं कि वे युवाओं को काम दिलवाएंगे, रोजगार के अवसर पैदा करेंगे.
दोनों ही पार्टियों के कार्यकर्ता आश्वस्त हैं कि जीत उन्हीं की होगी.
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंडी में बताया कि हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा भारी मीडिया कार्यक्रम चलाया हुआ है, उन्हें विश्वास है कि जनता कांग्रेस को ही वोट देगी.
उन्हें भरोसा है कि सुखराम का वापस आना पार्टी के लिए अच्छा है.
वो ये भी कह रहे हैं कि भाजपा का प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाना और वरिष्ठ नेता शांता कुमार की अनदेखी करना उनके हित में काम करेगा.
उधर प्रेम कुमार धूमल के धुर विरोधी माने जाने वाले शांता कुमार ने बीबीसी को बताया कि उन्हें नहीं मालूम कि पार्टी हाई कमान ने ये निर्णय क्यों किया.
उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना जीवन सिद्धांतों के मुताबिक बिताने की कोशिश की है, और उन्हें इसकी कीमत चुकानी पडी और इसके लिए वो गौरवान्वित हैं.
उनका कहना था कि पार्टी के निर्णय से उनके समर्थक निराश थे. लेकिन अब सब ठीक है और इसका चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
कांग्रेस का प्रचार
उधर कांग्रेस के चुनावी अभियान में वीरभद्र सिंह की मेहनत साफ़ नजर आ रही है.
वे युवाओं को भरोसा दिला रहे हैं कि वे उनके लिए ज़रूर कुछ न कुछ करेंगे.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को शिमला में एक चुनाव रैली को संबोधित किया.
उन्होंने बात की युवाओं को नौकरियां और बेहतर उच्च शिक्षा देने की और उन्हें बेहतर अवसर दिलाने की.
उनसे पहले भी कांग्रेस नेताओं ने युवाओं की रोज़गार समस्याओं के बारे में ही बात की.
चुनावी मुद्दे
पार्टियों को पता है कि बढ़ती बेरोज़गारी इन चुनावों में सबसे बड़ा मुद्दा है.
दोनों ही पार्टियों ने ही अपने चुनाव घोषणा पत्रों में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने की बात की है.
हिमाचल प्रदेश से एक बड़ी संख्या में नौजवान सेना में शामिल होना चाहते हैं.
मंडी में सेना के भर्ती केंद्र के निदेशक कर्नल सीएम दुआ कहते हैं कि नौजवानों में सेना में भरती होने की लगन तो है, लेकिन कई कारणों से वे ऐसा नहीं कर पाते हैं.
उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश से हर साल करीब ढाई हज़ार नौजवान सेना में भरती होते हैं और भारतीय सेना में एक बड़ी संख्या इन्हीं हिमाचली नौजवानों की है.
मंगलवार को दूसरे चरण का मतदान हैं. युवाओं की आकांक्षाएं हैं आसमां को छूने की, चाहे वो किसी भी क्षेत्र में हों.
और आने वाली सरकार को उनकी आकांक्षाओं को ध्यान में रखना ही पड़ेगा.