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मंगलवार, 18 दिसंबर, 2007 को 13:39 GMT तक के समाचार

नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर

गूजर आरक्षण रिपोर्ट केंद्र को

राजस्थान सरकार ने गूजरों के आरक्षण के मुद्दे पर चोपड़ा आयोग की रिपोर्ट को केंद्र सरकार को भेजने का फ़ैसला किया है. राज्य सरकार ने गूजरों का पिछड़ापन दूर करने के लिए एक चार सदस्यों की समिति गठित करने का भी फ़ैसला किया है.

राजस्थान के मंत्रिमंडल की बैठक में ये फ़ैसले किए गए हैं.

राजस्थान में गूजरों को आरक्षण देने के मुद्दे पर चोपड़ा आयोग की रिपोर्ट में उन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाने की सिफ़ारिश नहीं की गई है.

हालाँकि, ये रिपोर्ट उनके पिछड़ेपन, उत्थान के लिए पैकेज और अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने के लिए उचित मापदंड बनाए जाने का ज़िक्र ज़रूर करती है.

उधर गूजर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष किरोड़ी सिंह बैंसला ने आयोग की सिफ़ारिश को ख़ारिज कर दिया है. उन्होंने कहा है कि गूजरों का संघर्ष जारी रहेगा.

कुछ महीने पहले गूजरों की महापंचायत ने अनुसूचित जनजाति का दर्जा और आरक्षण दिए जाने की माँग की थी जिसके बाद एक हिंसक आंदोलन भी हुआ था.

इसके बाद अक्तूबर में गूजर फिर गिरफ़्तारियाँ देने सड़कों पर उतरे थे और चोपड़ा आयोग को इस मामले में सिफ़ारिशें देने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी.

'आंदोलन जारी रहेगा'

राजस्थान के मंत्रिमंडल ने फ़ैसला किया कि राज्यसभा सदस्य रामदास अग्रवाल की अध्यक्षता में चार सदस्यों की समिति गठित की जाए जो गूजरों का पिछड़ापन दूर करने के बारे में सुझाव दे.

इस समिति के अन्य सदस्य होंगे शिक्षा मंत्री घनश्याम तिवाड़ी, स्वास्थ्य मंत्री दिगंबर सिंह और सामाजिक न्याय मंत्री मदन दिलावर.

ये समिति अपनी रिपोर्ट राज्य के आगामी बजट सत्र से पहले राज्य सरकार को सौंपेगी.

उधर बैंसला ने कहा, "हमें इस मुद्दे पर कोई गोलमोल रिपोर्ट स्वीकार्य नहीं है और ये रिपोर्ट हमारे लिए एक झटका है. ये रिपोर्ट सरकार के साथ हुए समझौते के मुताबिक नहीं है."

उनका कहना था कि गूजर समुदाय को किसी तरह का पैकेज नहीं चाहिए और वे अनुसूचित जनजाति का दर्जा लेने पर कायम हैं.

उनका कहना था कि गूजर आरक्षण समिति क़ानून विशेषज्ञों से सलाह कर रही है और अपना आंदोलन जारी रखेगी.