सोमवार, 17 दिसंबर, 2007 को 06:18 GMT तक के समाचार
चीन से तिब्बत के लिए शुरु की गई नई विवादास्पद रेल के बाद तिब्बत जाने वाले पर्यटकों की संख्या में 'रिकार्ड बढ़ोतरी' हुई है.
चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार वर्ष 2007 में 40 लाख पर्यटक तिब्बत आए हैं जो पिछले वर्ष की तुलना में 64 प्रतिशत अधिक है.
अधिकारियों का कहना है कि बेहतरीन मार्केटिंग और परिवहन की बढ़ती सुविधाओं के अलावा विवादास्पद रेल सेवा के कारण पर्यटकों की संख्या बढ़ी है.
कम्युनिस्ट पार्टी के स्थानीय प्रतिनिधि चांग किंग्ली का कहना है कि तिब्बत पर्यटन के 'स्वर्णिम काल' में पहुंच रहा है.
ऐसी उम्मीद की जा रही है कि पर्यटन से इस वर्ष राजस्व में 73 प्रतिशत की वृद्धि होगी.
इससे पहले ल्हासा पहुंचने के लिए पर्यटकों को भारी मशक्कत करनी पड़ती थी लेकिन अब उच्च स्तरीय रेल से तिब्बत आसानी से पहुंचा जा सकता है.
तिब्बत और बीजिंग के बीच रेल सेवा क़रीब 17 महीने पहले शुरु हुई थी जिसके बाद तिब्बत में पर्यटन तो बढ़ा है लेकिन कई तिब्बती इस रेल सेवा से ख़ासे नाराज़ हैं.
तिब्बती लोगों की नाराज़गी का कारण चीनी लोगों का तिब्बत में आकर बसना है जो धीरे धीरे तिब्बत के व्यवसाय पर आधिपत्य जमा रहे हैं.
तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा ने मार्च में एक बयान जारी कर कहा था कि जब से ये रेल सेवा शुरु हुई है उसके बाद तिब्बत का पर्यावरण दूषित हुआ है और बाहरी ( चीनी लोगों ) लोगों के आने से स्थितियां ख़राब हुई हैं.
इतना ही नहीं पिछले महीने इस ट्रेन से बड़ी संख्या में चीनी सैनिक भी तिब्बत पहुंचे जिसके बाद चिंता जताई जा रही है कि इस ट्रेन के ज़रिए चीन तिब्बत में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है.
चीन ने 1950 में तिब्बत पर आक्रमण किया था जिसके बाद से दलाई लामा के नेतृत्व में तिब्बत की निर्वासित सरकार भारत के धर्मशाला शहर में रह रही है.