सोमवार, 17 दिसंबर, 2007 को 08:23 GMT तक के समाचार
विनीत खरे
बीबीसी संवाददाता, शिमला से
हिमाचल प्रदेश में 19 दिसंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सोमवार को प्रचार अभियान समाप्त हो गया है.
दूसरे चरण के इस चुनाव में 65 विधानसभा सीटों के लिए मत डाले जाएंगे.
इन चुनावों में मुख्य मुक़ाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच है.
हालांकि बेरोज़गारी इन चुनावों का मुख्य मुद्दा रहा है, लेकिन भाजपा भ्रष्टाचार को एक बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है.
चुनावी सभाओं में भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री पद के दावेदार प्रेम कुमार धूमल अपनी चुनावी सभाओं में कह रहे हैं कि अगर वे सत्ता में आए तो छह महीने के अंदर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के कथित मामलों की जांच करवाएंगे.
वे अपनी चुनावी सभाओं में वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी के ख़िलाफ भ्रष्टाचार में कथित रूप से शामिल होने का आरोप लगा रहे हैं.
कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है.
विकास पर ज़ोर
उधर कांग्रेस के स्टार प्रचारक सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कांग्रेस सरकार के दौरान हुए विकास पर ज्यादा ज़ोर दे रहे हैं.
सोनिया गांधी अपनी रैलियों में युवाओं को ज्यादा रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराने के वादे कर रही हैं.
दूसरी ओर राहुल गांधी हिमाचल प्रदेश से अपने परिवार के गहरे संबंधों की चर्चा कर रहे हैं.
उधर उत्तर प्रदेश में अपनी सफलता से उत्साहित मायावती बहुजन समाज पार्टी को कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के स्तर पर खड़ी करने की कोशिश में हैं.
कांग्रेस औऱ भाजपा से टूट कर कई नेताओं ने बसपा की ओर रुख़ किया है.
वैसे चुनाव प्रचार के दौरान मतभेद की ख़बरें भाजपा खेमे से भी काफ़ी आती रहीं है.
कहा जाता रहा है कि शांता कुमार के समर्थकों में इस बात से काफ़ी मायूसी है कि उनके बजाय प्रेम कुमार धूमल को भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में प्रस्तुत किया गया.
हालांकि बीबीसी से बात करते हुए धूमल ने इसे ग़लत ख़बर बताया और कहा कि उनके और शांता कुमार के बीच कोई मतभेद नहीं हैं.