रविवार, 16 दिसंबर, 2007 को 05:35 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान में मूसा क़ला से पलायन कर गए लोग धीरे-धीरे अपने घरों को लौट रहे हैं. इस शहर को अंतरराष्ट्रीय सेना ने तालेबान के क़ब्ज़े से मुक्त कराया है.
हालाँकि अधिकतर दुकानें और कारोबारी गतिविधियाँ अभी भी ठप हैं. सैंकड़ों सैनिकों की तैनाती के बावजूद स्थानीय लोगों को डर है कि कहीं तालेबान लड़ाके फिर हमला न कर दें.
स्थानीय निवासी वली मोहम्मद ने बताया कि उसे एक गली में महिलाओं और बच्चों के 15 शव देखा है.
ब्रितानी अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ़ दो बच्चों की मौत हुई है.
ब्रितानी रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है, "आम नागरिक सिर्फ़ एक घटना में हताहत हुए जब तालेबान ने एक परिवार के सभी सदस्यों को तेज़ स्पीड में गाड़ी चलाते हुए अंतरराष्ट्रीय सेना की ओर बढ़ने का आदेश दिया."
बयान में कहा गया है, "अंतरराष्ट्रीय सेना ने ठीक ही अंदाज लगाया कि गाड़ी में आत्मघाती हमलावर आ रहा है और फ़ायरिंग कर दी. इसमें गाड़ी में पीछे बैठे दो बच्चे मारे गए."
कामयाबी
ब्रिटिश, अमरीकी और अफ़ग़ान सेना ने चार दिनों की बमबारी और भीषण लड़ाई के बाद दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के मूसा क़ला शहर को तालेबान से मुक्त कराने में सफलता हासिल की.
अफ़ग़ान और नैटो की अगुआई में अंतरराष्ट्रीय सेना मूसा क़ला में प्रवेश कर चुकी है.
दूसरी ओर तालेबान लड़ाकों का कहना है कि वो जानबूझ कर पीछे हट गए हैं ताकि शहर में और लोगों की जानें न जाए.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि तालेबान आगे भी इस शहर पर फिर नियंत्रण कायम करने की कोशिश कर सकते हैं.
ब्रितानी सेनाओं ने 2006 में भारी संघर्ष के बाद मूसा क़ला पर कब्ज़ा कर लिया था.
लेकिन क़बायली नेताओं के हस्तक्षेप के बाद तालेबान लड़ाकों को रास्ता देने संबंधी एक विवादास्पद समझौते के बाद सेनाएँ पीछे हट गईं थीं.
इस साल फ़रवरी में तालेबान लड़ाके फिर वहाँ आ गए और उन्होंने वहाँ मोर्चा जमा लिया था.