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रविवार, 16 दिसंबर, 2007 को 13:31 GMT तक के समाचार

नक्सलियों समेत कई क़ैदी जेल से फ़रार

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जेल से रविवार को लगभग 300 क़ैदी भाग निकले हैं. इनमें बड़ी संख्या में नक्सलवादी शामिल हैं.

इस संदर्भ में राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी-जेल) एसके पासवान ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि घटना के बाद कार्रवाई करते हुए जेल सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले 10 लोगों को निलंबित कर दिया गया है.

निलंबित लोगों में से एक डिप्टी जेलर, एक एसिसटेंट जेलर, तीन मुख्य प्रहरी और पाँच प्रहरी हैं.

डीजीपी ने बताया कि घटना शाम पाँच बजे तब हुई जब क़ैदियों को भोजन परोसा जा रहा था. भोजन परोसते समय एक क़ैदी ने खाना दे रहे संतरी को पकड़ लिया और एक गुट ने जाकर गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मी को पकड़ लिया.

इसके बाद क़ैदियों ने सुरक्षाकर्मी से शस्त्रागार की चाबी छीन ली और शस्त्र निकालकर गोलीबारी शुरू कर दी. इसमें एक क़ैदी और दो संतरी घायल हो गए हैं.

इसके बाद क़ैदियों ने मुख्य दरवाज़ा खोल दिया और कई क़ैदी जेल से भाग निकले.

लापरवाही

डीजीपी ने बीबीसी को बताया कि उस वक्त जेल में 370 क़ैदी मौजूद थे जिनमें से काफी क़ैदी भागने में सफल रहे हैं.

हालांकि उन्होंने बताया कि वो घटनास्थल पर पहुँच रहे हैं. इन क़ैदियों को पकड़कर वापस जेल लाने का अभियान चलाया जाएगा और नक्सल विरोधी अभियान भी स्थानीय पुलिस की मदद से चलाया जाएगा.

डीजीपी ने स्वीकारा, "स्थानीय स्तर पर कुछ तो लापरवाही हुई है. जेल के अंदर कैसे कार्रवाई की जानी है, कैसे क़ैदियों को नियंत्रित करना है और कैसी सावधानी बरतनी है, इस बारे में स्पष्ट निर्देश हैं पर प्रथम दृष्टया लगता है कि इनकी अनदेखी की गई है."

उन्होंने बताया कि इसी कारण सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई भी की गई है.

डीजीपी ने कहा कि आगे जाँच के बाद जो भी अन्य अधिकारी और कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उनके ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की जाएगी.

छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री रामविचार नेताम का कहना था, ''क़ैदियों ने सुरक्षा व्यवस्था में कमी का फायदा उठाया. इस मामले की जाँच की जा रही है. हमने उनकी तलाश में पुलिस दल भेजे हैं.''

उल्लेखनीय है कि बस्तर का दंतेवाड़ा ज़िला देश के सबसे अधिक नक्सल प्रभावित ज़िलों में से है. छत्तीसगढ़ के 16 में से आठ ज़िलों में नक्सलवादी विद्रोहियों का प्रभाव माना जाता है.

यहाँ नक्सलियों के ख़िलाफ़ कथित जनआंदोलन सलवा जुड़ूम चल रहा है. राज्य सरकार इस आंदोलन का समर्थन कर रही है.

ग़ौरतलब है कि पिछले दो साल में बस्तर में नक्सली हिंसा बढ़ी है और सैकड़ों लोग इसका शिकार हुए हैं.