बांग्लादेश में नवंबर में आए चक्रवाती तूफ़ान से तीन हजार लोग मारे गए थे लेकिन साथ ही सुंदरवन का 40 फ़ीसदी हिस्सा भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
यूनेस्कों के विशेषज्ञों ने गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदी के डेल्टा में स्थित जंगल में अध्ययन के बाद इसका खुलासा किया है.
सुंदरवन, जैव विविधता वाला क्षेत्र है और ये यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में शामिल है.
यूनेस्को के विशेषज्ञों ने अध्ययन में पाया कि सिद्र तूफ़ान से सुंदरवन के लगभग 40 फ़ीसदी हिस्सा बुरी तरह प्रभावित हुआ है, लेकिन सुंदरवन का हृदय माने जाने वाले पूर्वी हिस्से को अधिक नुकसान पहुंचा है.
पूर्वी सुंदरवन जैविक रूप से बेहद धनी है. तूफ़ान के कारण वन के 30 फ़ीसदी पेडों से पत्तियां गिर गईं. तेज़ हवाओं के कारण बड़े पेड़ गिर गए. कई पेड़ों के ऊपरी हिस्से को इससे भारी नुकसान पहुंचा.
सुंदरवन की विशेषता
एक लाख 40 हजार एकड़ में फैला सुंदरवन दुनिया का सबसे बड़े मैंग्रोव के जंगल है. इसे ज्वारा भाटा की लहरें, दलदल और छोटे-छोटे द्वीपों की जटिल संरचना विभाजित करती है. सुंदरवन विभिन्न प्रजातियों के पशु-पक्षियों का निवास स्थान है.
इसमें क़रीब 260 प्रजाति के पक्षी, बंगाल टाइगर और अन्य लुप्तप्राय प्रजातियां पाई जाती हैं, जिसमें मगरमच्छ और भारतीय अजगर भी शामिल हैं. इन जीव-जंतुओं पर तूफ़ान का क्या प्रभाव पड़ा इसका अध्ययन किया जाना अभी बाक़ी है.
विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि शिकार और घुसपैठ से सुंदरवन का परिस्थितिक तंत्र का पुनर्जनन जोखि़म में पड़ जाएगा, और एक अनुमान के मुताबिक़ इसमें 10 से 15 साल का समय लग सकता है.
तूफ़ान में सुंदरवन स्थित बांग्लादेश वन विभाग की चौकियां, नाव, जेट्टी और अन्य उपकरण तबाह हो गए. सुंदरवन को 1997 में यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया था.
सुंदरवन, झींगा मछली सहित विभिन्न किस्मों की मछलियों और केकड़ों के लिए प्रजजन का उचित स्थान है. और इन्हीं पर इस क्षेत्र में रहने वाले तीन लाख लोगों की आजीविका निर्भर है.
सहयोग की अपील
यूनेस्को ने दानदाताओं से अपील की है कि वे बांग्लादेश वन विभाग की दूर दराज़ स्थित चैकियों, जेट्टियों के पुननिर्माण के प्रयास में सहयोग करें.
यूनेस्को, संयुक्त राष्ट्र संघ के अन्य संगठनों और ग़ैर सरकारी संगठनों के साथ मिलकर देश में पुनर्निमाण में बांग्लादेश के अधिकारियों का सहयोग कर रहा है.
यूनेस्कों का ढाक़ा स्थित कार्यालय बांग्लादेश सरकार के साथ तूफ़ान से प्रभावित विभिन्न इकाइयों के पुनर्निमाण के लिए काम कर रहा
है. इनमें स्कूल प्रमुख हैं.