शनिवार, 15 दिसंबर, 2007 को 08:00 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने आपातकाल हटाने के बाद अपने संदेश में कहा है कि अगले महीने होने वाले आम चुनाव निष्पक्ष होंगे.
उन्होंने चुनाव में अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को भी न्यौता दिया.
इससे पहले मुशर्रफ़ ने 15 दिसंबर को देश से इमरजेंसी हटा ली. इसके साथ ही संविधान और जनता के मौलिक अधिकार बहाल हो गए.
कई पश्चिमी देशों ने इसका स्वागत किया है. ये क़दम पाकिस्तान में होने वाले चुनाव तीन हफ़्ते पहला उठाया गया है.
ज़्यादातर पार्टियों ने इसपर सर्तकतापूर्ण प्रतिक्रिया दी है. विपक्षी पार्टियों का कहना है कि राष्ट्रपति मुशरर्फ़ ने आपातकाल के अधिकारों का इस्तेमाल अपने समर्थकों के पक्ष में किया है.
बीबीसी संवाददाता के मुताबिक इमरजेंसी का हटाया जाना एक अहम क़दम है लेकिन अभी भी कई लोग मानते हैं कि इससे व्यावहारिक स्तर पर इससे कोई फ़र्क़ नहीं आएगा.
इमरजेंसी के दौरान जिन जजों को हटा दिया गया था उन्हें बहाल नहीं किया जाएगा और मीडिया पर भी कुछ रोक रहेगी.
आशंकाएँ बरकरार
कई आलोचकों का कहना है कि भले ही आपातकाल हटा लिया गया है लेकिन जजों की बहाली और मीडिया पर प्रतिबंध जैसे मुद्दों पर स्थिति ज्यों की त्यों है.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ पर दबाव था कि वो आठ जनवरी को प्रस्तावित आम चुनाव से पहले इमरजेंसी हटा लें.
इसलिए वर्दी उतार कर जब उन्होंने दोबारा राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी, तभी उन्होंने 16 दिसंबर को इमरजेंसी हटाने की घोषणा कर दी थी. बाद में इस तिथि को एक दिन पहले यानी 15 दिसंबर कर दिया गया.
परवेज़ मुशर्रफ़ ने आपातकाल हटाए जाने से पहले देश में चार नए अध्यादेश जारी किए.
ग़ौरतलब है कि तीन नवंबर 2007 को राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने पाकिस्तान में आपातकाल लागू करने की घोषणा कर दी थी.
इसके बाद मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी सहित कई जजों को नज़रबंद कर दिया गया था.
आपातकाल का देश में तो व्यापक स्तर पर विरोध हुआ ही था, साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से भी परवेज़ मुशर्रफ़ पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था.
इस दौरान देश में कई नेताओं, प्रदर्शनकारियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया था.
हालांकि बाद में मुशर्रफ़ ने कहा था कि आपातकाल को जल्द ही हटा लिया जाएगा और साथ ही उन्होंने आठ जनवरी को आम चुनाव कराने की घोषणा की.