शुक्रवार, 14 दिसंबर, 2007 को 01:52 GMT तक के समाचार
अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने आरोप लगाया है कि उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नैटो) के कुछ सदस्य देश अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के ख़िलाफ़ जारी संघर्ष में ढीले पड़ रहे हैं.
हालाँकि उन्होंने किसी देश का नाम लेने से इनकार कर दिया.
ये पूछे जाने पर कि क्या वो जर्मनी से और अधिक मदद की उम्मीद करते हैं, उनका कहना था कि वो नैटो के सभी सदस्य देशों से अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा और आर्थिक विकास की रणनीति में और सहयोग चाहते हैं.
वो स्कॉटलैंड में पत्रकारों से बात कर रहे थे जहाँ शुक्रवार को नैटो के रक्षा मंत्रियों की बैठक होने वाली है.
अभी अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के ख़िलाफ़ कई जगहों पर संघर्ष चल रहा है.
इस कड़ी में अंतरराष्ट्रीय सैनिकों की मदद से मूसा क़ला शहर को तालेबान के क़ब्ज़े से मुक्त करा लिया गया है और पहली बार अफ़ग़ान अधिकारियों ने इस शहर में प्रवेश किया है.
निराशा
तालेबान के ख़िलाफ़ संघर्ष में मुख्य रुप से ब्रिटेन, अमरीका, कनाडा और नीदरलैंड के सैनिक हिस्सा ले रहे हैं.
अमरीका इस बात से निराश है कि उसके यूरोपीय सहयोगी अपनी सेना को अग्रिम मोर्चों पर नहीं भेज रहे हैं.
जर्मनी के बारे में गेट्स का कहना था, "उनके सैनिक ऐसी जगहों पर हैं जहाँ ज़्यादा हिंसा नहीं है, दूसरी ओर हम दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में सक्रिय हैं जहाँ संघर्ष तेज़ है."
पिछले दिनों अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने भी देश की सशस्त्र सेनाओं को मज़बूत बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ज़्यादा मदद की अपील की थी.
हाल में अफ़गान रक्षा मंत्रालय ने भी देश में दो लाख सशस्त्र बलों की ज़रूरत बताई थी. लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में सेना की स्थापना के लिए पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय सहयोग नहीं है.
वर्ष 2001 में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से 70 हज़ार सैनिकों के लायक धन उपलब्ध कराने के लिए सहमति हुई थी.
इसके अलावा जल्द ही सभी अफ़गान सैनिकों को अमरीका निर्मित एम-16 रायफ़लों से लैस करने की योजना है. अत्याधुनिक विश्वस्तरीय हेलीकॉप्टर और टैंक भी उन्हें उपलब्ध कराए जा रहे हैं.