गुरुवार, 13 दिसंबर, 2007 को 16:49 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में हुए एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण में पता चला है कि बहुमत परवेज़ मुशर्रफ़ को दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के ख़िलाफ़ है.
अधिकतर लोगों ने इमरजेंसी लगाए जाने की भी आलोचना की.
यह सर्वेक्षण अमरीका स्थित इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट-आईआरआई ने किया था.
इस बीच राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के वकीलों ने कहा है कि वह जल्दी ही इमरजेंसी हटा लेंगे लेकिन यह घोषणा यह सुनिश्चित करने के बाद ही की गई है कि उन्हें अदालत के सामने पेश नहीं किया जाएगा.
आईआरआई का कहना है कि उन्होंने पाकिस्तान भर में साढ़े तीन हज़ार वयस्कों से बात की और उनका कहना है कि तीन नवंबर को इमरजेंसी का ऐलान होने के बाद से यह सबसे बड़ा जनमत संग्रह है.
बहुमत दोबारा चयन के ख़िलाफ़
जिन लोगों से सवाल पूछे गए उनमें से 70 प्रतिशत का कहना था कि वे अगले पाँच साल के लिए दोबारा राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को इस पद पर नहीं देखना चाहते.
दो-तिहाई का कहना था कि वे चाहते हैं कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ इस्तीफ़ा दे दें.
इमरजेंसी की स्थिति को लेकर भी व्यापक विरोध था. 70 प्रतिशत लोगों का कहना था कि ऐसा होना ही नहीं चाहिए था.
इसके अलावा संविधान को निरस्त किए जाने, राजनीतिक रैलियों पर रोक, सुप्रीम कोर्ट के भूतपूर्व न्यायाधीशों को हिरासत में लिए जाने और मीडिया पर पाबंदी का भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रकट किया गया.
सर्वेक्षण में शामिल दो-तिहाई लोगों का मानना था कि इमरजेंसी लगाए जाने का कारण आतंकवाद का मुक़ाबला नहीं था बल्कि सुप्रीम कोर्ट को राष्ट्रपति के दोबारा चुनाव पर पाबंदी लगाने से रोकना था.
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को कुछ समर्थन भी हासिल हुआ लेकिन केवल एक चौथाई लोगों का ही.
राय पुरानी पड़ गई है
वैसे, इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता जिल मैकगिवरिंग का कहना है कि यह जनमत अब कुछ पुराना भी माना जा सकता है.
यह नवंबर में उस समय कराया गया था जब राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने इमरजेंसी लागू की ही थी लेकिन उसके बाद उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण क़दम उठाए. जैसे, सेनाध्यक्ष के पद से हटना और इस बात की पुष्टि कि चुनाव जनवरी में ही होंगे.
और इस सर्वेक्षण के पूरा होने के बाद ही इस बात का भी ऐलान हुआ था कि इमरजेंसी 15 दिसंबर को हटा ली जाएगी.