गुरुवार, 13 दिसंबर, 2007 को 12:29 GMT तक के समाचार
मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट न्यायपालिका की सक्रियता पर हाल में की गई दो जजों की पीठ की टिप्पणी से बँधा नहीं है.
ग़ौरतलब है कि इसी सप्ताह सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एके माथुर और मार्कंडेय काटजू की पीठ ने कहा था कि न्यायपालिका की सक्रियता के नाम पर कार्यपालिका के कार्यों में हस्तक्षेप करना असंवैधानिक है.
समाचार एजेंसियों के अनुसार दो सदस्यीय पीठ ने आगे कहा था, ''संविधान में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की ज़िम्मेदारी स्पष्ट है. अगर क़ानून है तो जज उसे लागू करा सकते हैं लेकिन जज क़ानून बना कर उसे लागू नहीं करा सकते.''
जनहित याचिका का मामला
उत्तर प्रदेश के वृंदावन की विधवाओं के पुनर्वास के लिए एक स्वयंसेवी संस्था की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ कहा,'' हम दो न्यायाधीशों की टिप्पणी से बँधे नहीं हैं.''
मुख्य न्यायाधीश ने यह टिप्पणी उस समय की जब याचिकाकर्ता ने कहा कि न्यायपालिका की सक्रियता पर हाल में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद अदालतें जनहित याचिकाएं स्वीकार करने से मना कर रही हैं.
वृंदावन की विधवाओं के पुनर्वास के लिए दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है.