http://www.bbcchindi.com

बुधवार, 12 दिसंबर, 2007 को 12:14 GMT तक के समाचार

मोदी को अवमानना नोटिस

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सोहराबुद्दीन शेख़ फ़र्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई के दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को न्यायालय की अवमानना का नोटिस जारी किया है.

सोहराबुद्दीन शेख़ 26 नवंबर 2005 को गुजरात पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) और राजस्थान पुलिस की कार्रवाई में मारे गए थे.

हाल में गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोहराबुद्दीन मुठभेड़ को सही ठहराते हुए बयान दिया था.

उधर सोहराबुद्दीन शेख़ के भाई रूबाबुद्दीन शेख़ ने पहले ही न्यायालय में सोहराबुद्दीन की पत्नी के बारे में पता लगाने के लिए याचिका दायर कर रखी है.

मुख्यमंत्री मोदी के बयान के बाद रूबाबुद्दीन शेख़ ने अदालत में एक अर्ज़ी दी थी और मोदी के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग की थी. उसी मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को ये नोटिस जारी किया है.

ग़ौरतलब कि जावेद अख़्तर और शबनम हाशमी की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने भी इस मामले से संबंधित एक याचिका दायर की थी.

उस याचिका में मुख्यमंत्री मोदी की गुजरात के पुलिस अधिकारी डीजी वंजारा की मुठभेड़ों में भूमिका और सोहराबुद्दीन मामले पर उनके बयान के बाद कार्रवाई की माँग की गई थी.

'मौजूदगी ज़रूरी नहीं'

अवमानना का नोटिस जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि फ़िलहाल नरेंद्र मोदी को अदालत में मौजूद होने की ज़रूरत नहीं है.

न्यायालय में गुजरात सरकार के वकील ने ज़ोरदार तरीक़े से मुख्यमंत्री का बचाव करने की कोशिश की थी.

उन्होंने अभी नोटिस जारी करने की प्रार्थना का विरोध करते हुए कहा कि नोटिस जारी करने का अभी समय नहीं आया है और राज्य में विधानसभा चुनाव भी चल रहे हैं.

उधर वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे का तर्क था कि राज्य सरकार बहानेबाज़ी कर रही है और इस मुद्दे पर अवमानना का मामला बनता है और अदालत को नोटिस जारी करना चाहिए.

महत्वपूर्ण है कि मोदी के बयान को गुजरात सरकार के वकील केटीएस तुलसी ने भी अनुचित ठहराया था. इसके बाद तुलसी की जगह पर राज्य सरकार ने रंजीत कुमार को वकील नियुक्त किया था.

ग़ौरतलब है कि सोहराबुद्दीन पर मोदी के बयान से मचे बवाल के कुछ ही दिन बाद मोदी ने एक जनसभा में कहा था कि उन्होंने कभी फ़र्ज़ी पुलिस मुठभेड़ को सही नहीं ठहराया.

कुछ नरम दिख रहे मोदी ने कहा था, "फ़र्ज़ी मुठभेड़ को स्वीकार नहीं किया जा सकता. मैंने कभी इसे जायज़ नहीं ठहराया. मैंने हमेशा इसकी भर्त्सना की है."