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मंगलवार, 11 दिसंबर, 2007 को 11:38 GMT तक के समाचार

रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, उत्तर प्रदेश

ज़मीन पर अमिताभ का दावा ख़ारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बाराबंकी ज़िले की एक खेती योग्य ज़मीन पर अभिनेता अमिताभ बच्चन के दावे को ख़ारिज कर दिया है.

खंडपीठ ने इस बारे में मंगलवार को फ़ैसला सुनाते हुए बाराबंकी ज़िले के दौलतपुर गांव की एक विवादित खेतिहर ज़मीन पर अमिताभ बच्चन के दावे को ग़लत क़रार दिया है, हालांकि हाईकोर्ट ने अमिताभ को इस मामले में कुछ राहत भी दी है.

हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि इस ज़मीन पर दावे के मामले में अमिताभ बच्चन पर अब धोखाधड़ी, आपराधिक या दीवानी का आगे कोई मुक़दमा नहीं चलाया जाए.

जस्टिस एएन वर्मा की लखनऊ खंडपीठ ने अमिताभ बच्चन को इस बारे में दायर याचिका वापस लेने की अनुमति भी दे दी है.

फ़ैसले में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि ज़मीन के संदर्भ में फ़ैजाबाद आयुक्त और बाराबंकी के ज़िलाधिकारी का वह आदेश बहाल रहेगा जिसमें अमिताभ बच्चन के नाम पर ज़मीन दर्ज किए जाने को ग़लत बताया गया था.

पर साथ ही यह निर्देश भी दिए गए हैं कि अमिताभ बच्चन ने फ़ैसला आने से पहले ही ज़मीन से अपना दावा छोड़ दिया था इसलिए उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई न की जाए.

मामला

दरअसल, इस विवाद की शुरुआत पुणे में बच्चन परिवार की ओर से आठ हेक्टेअर ज़मीन का एक प्लाट ख़रीदने की कोशिश के साथ हुई थी.

पुणे के पास स्थित इस मवाल क्षेत्र में ज़मीन ख़रीदने के लिए ख़रीददार का किसान होना ज़रूरी है. बच्चन परिवार यहाँ पर एक फ़ार्म हाउस बनाना चाहता था.

ख़ुद को किसान बताने के लिए उन्होंने जो काग़ज़ात जमा किए उनमें बताया गया था कि अमिताभ बच्चन बाराबंकी में एक भूखंड के मालिक हैं जो कृषि कार्य में इस्तेमाल होती है.

ज़मीन के दस्तावेज के मुताबिक 11 जनवरी, 1983 से अमिताभ बच्चन इस ज़मीन के मालिक हैं. इस दस्तावेज़ को जाँच के लिए संबंधित अधिकारी ने बाराबंकी के जिलाधिकारी के कार्यालय भेजा.

जब राज्य प्रशासन की ओर से इस ज़मीन के कागज़ात जाँच के लिए ज़िला बाराबंकी ज़िला मुख्यालय आए तो इनकी जाँच के बाद अधिकारियों ने इन्हें फ़र्ज़ी क़रार दिया.

फैज़ाबाद के आयुक्त ने जाँच के बाद कहा था कि अमिताभ बच्चन का बाराबंकी ज़िले के दौलतपुर गाँव की ज़मीन पर कोई हक़ नहीं बनता और काग़ज़ात में हेराफेरी करके उन्हें ग़लत ढंग से उसका मालिक बताया गया है.

फैज़ाबाद के आयुक्त ने सिफ़ारिश की थी कि इस मामले में अमिताभ बच्चन के ख़िलाफ़ आपराधिक मुक़दमा चलाया जाना चाहिए.

अदालती कसरत

आयुक्त के इस फ़ैसले को अमिताभ बच्चन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में चुनौती दी थी.

लेकिन इसके पहले ही अमिताभ बच्चन के वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत में हलफ़नामा दायर करके सूचित किया था कि अमिताभ बच्चन ने विवादित ज़मीन पर अपना दावा छोड़ दिया है.

उनकी दलील थी कि इसके बाद उनके मुवक्किल के ख़िलाफ़ कोई क़ानूनी कार्रवाई करने का औचित्य नहीं रह जाता लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार के वकील देवेंद्र उपाध्याय की दलील थी कि मुक़दमा इस बारे में है कि बाराबंकी के ज़िलाधिकारी ने दस्तावेज़ों की जाँच के बाद पाया था कि अमिताभ बच्चन को ग़लत तरीक़े से उस ज़मीन का मालिक दिखाया गया था जो उनकी नहीं थी.

सरकारी वकील का तर्क था कि ज़मीन पर से दावा वापिस लेने का हलफ़नामा दायर करने का कोई असर उनके ख़िलाफ़ क़ायम अभियोग पर नहीं पड़ेगा.

फ़ैसला आने से पहले ही अमिताभ ने इस ज़मीन से अपना दावा वापस ले लिया था लेकिन माना जा रहा था कि अगर इस ज़मीन के मामले में अमिताभ के ख़िलाफ़ कोई धोखाधड़ी या आपराधिक मामला चलता तो उनकी मुश्किलें और बढ़ जातीं.

हालांकि ऐसा नहीं हुआ है और अमिताभ बच्चन को ज़मीन के मामले में अदालत ने राहत भी दे दी है.