मंगलवार, 11 दिसंबर, 2007 को 09:38 GMT तक के समाचार
अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने देश की सशस्त्र सेनाओं को मज़बूत बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ज़्यादा मदद की अपील की है.
करज़ई का ये बयान ऐसे समय आया है जब मूसाकलां शहर को तालेबान के कब्ज़े से वापस लेने के लिए नेटो सेनाओं के सहयोग से अफ़गान सेनाओं का अभियान जारी है.
हाल में अफ़गान रक्षा मंत्रालय ने भी देश में दो लाख सशस्त्र बलों की ज़रूरत बताई थी. लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में सेना की स्थापना के लिए पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय सहयोग नहीं है.
अंतरराष्ट्रीय मदद
हालांकि 2001 में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से 70 हज़ार सैनिकों के लिए धन उपलब्ध कराने के लिए सहमति हुई थी.
इसके अलावा जल्द ही सभी अफ़गान सैनिकों को अमरीका निर्मित एम-16 रायफ़लों से लैस करने की योजना है. अत्याधुनिक विश्वस्तरीय हेलीकॉप्टर और टैंक भी उन्हें उपलब्ध कराए जा रहे हैं.
संवाददाता के मुताबिक अफ़गानिस्तान सरकार को न सिर्फ़ तालेबान से निपटने बल्कि देश में स्थायित्व लाने के लिए बड़ी सेना की ज़रूरत है. और पाकिस्तान में चल रही अस्थिरता को देश में फैलने से रोकने के लिए भी.
पड़ोसी ईरान में लगभग साढ़े तीन लाख की मज़बूत सेना है. हालांकि माना जाता है कि वहां ज़्यादातर सैनिकों को जबरन सेना में भर्ती किया गया है.
लेकिन अफ़गान सरकार के काउंटर-नारकोटिक्स विभाग के मंत्री जनरल खोदीदाद समेत सरकार के कुछ अन्य सदस्यों का मानना है कि सेना में युवकों की जबरन भर्ती ही सिर्फ़ मज़बूत और बड़ी सेना बनाने का रास्ता है.
लेकिन हामिद करज़ई ने इन मांगों को नकार दिया है.