सोमवार, 10 दिसंबर, 2007 को 21:11 GMT तक के समाचार
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम निर्देश में कहा है कि न्यायिक सक्रियता के नाम पर कार्यपालिका के कार्यों में हस्तक्षेप करना असंवैधानिक है.
न्यायमूर्ति एके माथुर और मार्कंडेय काटजू की पीठ ने यह अभूतपूर्व टिप्पणी माली पद पर भर्ती व्यक्ति को पद सृजित कर ड्राइवर के रूप में नियमित करने के कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए सुनाया.
पीठ का कहना था कि जजों को अपनी सीमा मालूम होनी चाहिए, वे सरकार चलाने की कोशिश न करें.
सर्वोच्च अदालत ने जजों के व्यवहार का ज़िक्र करते हुए कहा उन्हें 'सम्राट' जैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए.
विधायिका और न्यायपालिका के बीच टकराव के मद्देनज़र सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला अहम माना जा रहा है.
कोर्ट ने देश-विदेश के विभिन्न फ़ैसलों और बुद्धिजीवियों की टिप्पणियों का उदाहरण दिया है जिसमें न्यायपालिका को सीमा में रहने और सीमाएं लांघने के परिणामों के बारे में चेताया गया है.
पीठ ने ध्यान दिलाया कि संविधान में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की ज़िम्मेदारी स्पष्ट है, इनमें अतिक्रमण से संवैधानिक संतुलन बिगड़ जाएगा.
पीठ का कहना था कि अगर क़ानून है तो जज उसे लागू करा सकते हैं लेकिन जज क़ानून बना कर उसे लागू नहीं करा सकते.