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सोमवार, 10 दिसंबर, 2007 को 20:06 GMT तक के समाचार

जजों को बहाल किया जाए:भगवान दास

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रह चुके राणा भगवान दास ने इमरजेंसी पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के रवैये की आलोचना की है.

पिछले महीने जब राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने संविधान को निलंबित कर इमरजेंसी लागू किया उसके बाद राणा भगवान दास उन जजों में से एक थे जिन्हें बर्ख़ास्त कर दिया गया था.

उन्होंने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान में लोकतंत्र की बहाली के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहा है.

राणा भगवान दास का कहना था कि जब तक उन्हें और उनके सहयोगियों को बहाल नहीं किया जाता तब तक जनवरी में होने वाले चुनाव की निष्पक्षता पर कुछ नहीं कहा जा सकता.

परवेज़ मुशर्रफ़ ने 15 दिसंबर को इमरजेंसी हटा लेने की घोषणा की है. नवंबर के आख़िर में उन्होंने वर्दी उतार कर नागरिक राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली है.

'क़ानूनी आधार नहीं'

अपने घर से मोबाइल फ़ोन पर दिए इंटरव्यू में भगवान दास ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान के ज़मीनी हालात और मानवाधिकारों से परिचित नहीं है. जो भी कहा और किया गया है वो पर्याप्त नहीं है."

उन्होंने बताया कि वो और उनके सहयोगी नज़रबंदी की हालत में जी रहे हैं और बिना अनुमति के उन्हें अपने रिहायशी परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं है.

राणा भगवान दास का कहना था कि उन्हें किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है और उनका मुख्य फ़ोनलाइन काट दिया गया है.

उनका कहना था कि उनकी नज़रबंदी का कोई क़ानूनी आधार नहीं है क्योंकि उनके ख़िलाफ़ कोई गिरफ़्तारी का वारंट नहीं है.