दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के मूसा क़ला इलाक़े पर कब्ज़े के लिए भारी संघर्ष जारी है.
अमरीकी, नैटो और अफ़ग़ान सेनाएँ इस इलाक़े पर कब्ज़े के लिए तालेबान विद्रोहियों से संघर्ष कर रही हैं. ये संघर्ष पिछले कई दिनों से जारी है.
इधर स्थानीय लोगों का कहना है कि इस संघर्ष की चपेट में आकर 40 से अधिक आम नागरिकों की मौत हो गई है.
लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने इससे इनकार किया है.
काबुल स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय सेनाओं के कमांडर का कहना है कि तालेबान को पीछे धकेल दिया गया है और ये अभियान योजना के अनुसार चल रहा है.
दूसरी ओर तालेबान के प्रवक्ता का कहना था कि उनका मकसद मूसा क़ला पर हर कीमत पर जमे रहने नहीं है बल्कि विरोधी पक्ष के हताहतों की संख्या को बढ़ाना है
उल्लेखनीय है कि फ़रवरी में इस इलाक़े पर तालेबान विद्रोहियों ने कब्ज़ा कर लिया था.
संवाददाता का कहना है कि ब्रितानी सेनाओं ने 2006 में भारी संघर्ष के बाद मूसा क़ला पर कब्ज़ा कर लिया था.
लेकिन क़बायली नेताओं के हस्तक्षेप के बाद तालेबान लड़ाकों को रास्ता देने संबंधी एक विवादास्पद समझौते के बाद सेनाएँ पीछे हट गईं थीं.
इस साल फ़रवरी में तालेबान लड़ाके फिर वहाँ आ गए और उन्होंने वहाँ मोर्चा जमा लिया.
ये इलाक़ा अफीम के व्यापार का केंद्र भी है और अब दोनों पक्षों के लिए ये प्रतीकात्मक महत्व का केंद्र बन गया है.