बुधवार, 05 दिसंबर, 2007 को 08:14 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, उत्तर प्रदेश
बाघ की खाल और हड्डियों की तस्करी और अवैध शिकार के मामले में उत्तर प्रदेश की पुलिस ने 16 लोगों को गिरफ़्तार किया है.
पुलिस के मुताबिक इलाहाबाद में गिरफ़्तार किए गए लोगों के पास से बाघ की खाल, बाल और हड्डियाँ बरामद हुई हैं.
एक ताज़ा अध्ययन में यह बात सामने आई थी कि भारत में बाघों की संख्या घट कर 1500 रह गई है. इसके मद्देनज़र सरकार ने बाघों के संरक्षण के लिए 'टाइगर टास्क फोर्स' का गठन किया था.
वर्ष 2002 में हुए एक बड़े सर्वेक्षण में भारत में बाघ की संख्या महज़ 3642 बताई गई थी. माना जाता है कि एक सदी पहले यह संख्या 40 हज़ार के क़रीब थी.
घटती संख्या
बाघों की घटती संख्या के लिए वन्यजीव संरक्षण के कार्यकर्ता अवैध शिकार और शहरीकरण की प्रक्रिया को ज़िम्मेदार ठहराते हैं. उनका कहना है कि सरकार को इसे रोकने के लिए ठोस क़दम उठाने चाहिए.
उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अभिताभ यश का कहना था, "पुलिस ने गिरफ़्तार किए गए लोगों के पास से बाघ की चार खालें, 100 किलोग्राम हड्डियां और बाल बरामद किए हैं."
उन्होंने कहा कि 12 शिकारियों का एक दल जिसमें 10 महिलाएँ शामिल थी, इलाहाबाद में चार तस्करों को बाघ के अंगों को बेचने आया था.
इसी वर्ष मई में सरकार की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि देश में बाघों की संख्या अनुमान से काफ़ी कम है.
भारत के वन्यजीव संस्थान के एक अध्ययन के मुताबिक कुछ राज्यों में पिछले पाँच सालों में बाघों की संख्या में दो तिहाई की कमी आई है.
वन्यजीव विशेषज्ञों ने बाघों के अवैध शिकार और खाल की तस्करी को रोकने में नाक़ामी के लिए सरकार की काफ़ी आलोचना की थी.
बाघ की खाल का फैशन और 'ओरियंटल' यानी पारंपरिक औषधि बनाने में इस्तेमाल होता है. चीनी बाज़ार में बाघ के कच्चे चमड़े की क़ीमत 12, 500 डॉलर तक मिल जाती है.
उल्लेखनीय है कि विश्व के 40 प्रतिशत बाघ भारत में रहते हैं.