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बुधवार, 28 नवंबर, 2007 को 12:29 GMT तक के समाचार

मौजूदा समझौता मंज़ूर नहीं: आडवाणी

भारत के मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने कहा है कि अगर वह सत्ता में आया तो परमाणु समझौते के ‘आपत्तिजनक’ पहलुओं को हटाने के लिए अमरीका से फिर बातचीत करेगा.

भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर लोकसभा में नियम 193 के तहत हो रही चर्चा में हिस्सा लेते हुए विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि 123 समझौते में कई आपत्तिजनक बातें हैं और राष्ट्रहितों के ख़िलाफ़ हैं.

उन्होंने कहा कि अगर एनडीए फिर से सत्ता में आता है तो समझौते के आपत्तिजनक पहलुओं को हटाने के लिए अमरीका से बातचीत करेगा और अगर वह इन्हें हटाने पर राजी नहीं हुआ तो समझौता रद्द कर देगा.

'जूनियर पार्टनर'

उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत को उसके परमाणु परीक्षण के अधिकार से वंचित करता है.

यह समझौता भारत को ‘जूनियर पार्टनर’ के रूप में पेश करता है, यहाँ तक कि अमरीकी निरीक्षक भी भारत के परमाणु रिएक्टरों की जाँच कर सकते हैं.

चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि विपक्ष के आरोपों ख़ारिज़ कर दिया. उन्होंने कहा कि समझौता भारत को परमाणु परीक्षण के उसके अधिकार से वंचित नहीं करता.

आडवाणी ने कहा, "आज की तारीख़ में 123 समझौता जिस रूप में है, वह हमें अस्वीकार्य है. कोई भी स्वाभिमानी देश इसे स्वीकार नहीं कर सकता."

अपना पक्ष रखते हुए आडवाणी ने कई बार पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का नाम लिया और कहा कि यह समझौता भारत के हित में नहीं है.

आडवाणी ने कहा, "इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी देश की संप्रभुता का अतिक्रमण करने वाले इस तरह के समझौते पर कभी राजी नहीं होते."

अभी ये बहस चल रही है जिसमें वाम दलों को अपना पक्ष रखना है. बाद में प्रधानमंत्री पूरी बहस पर अपना पक्ष रखेंगे.