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मंगलवार, 27 नवंबर, 2007 को 06:43 GMT तक के समाचार

सुबीर भौमिक
बीबीसी संवाददाता, पूर्वोत्तर भारत

महिला से दुर्व्यवहार मामले में गिरफ़्तारी

भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम की राजधानी गुवाहाटी में शनिवार को एक आदिवासी महिला को निर्वस्त्र करने के मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है.

इन व्यक्तियों को टेलीविज़न कैमरों ने महिला के कपड़े फाड़ते हुए रिकार्ड कर लिया था.

असम के पुलिस प्रमुख आरएन माथुर ने कहा, "तीन व्यक्ति हमारी हिरासत में हैं और हम उनके ख़िलाफ़ आदिवासी महिला का अपमान करने और उन पर हमला करने का मुक़दमा दर्ज करेंगे."

उन्होंने कहा कि टेलीविज़न अंशों का विश्लेषण करने के बाद कुल मिलाकर 18 स्थानीय लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

शर्मनाक़ घटना

शनिवार को ऑल आदिवासी स्टूडेंट्स ऑफ़ असम के प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी जिसमें दो आदिवासी मारे गए थे और ढाई सौ घायल हुए थे.

टेलीविज़न फुटेज में हिंसा के दौरान दो स्थानीय लोगों को एक आदिवासी महिला को निर्वस्त्र करते हुए और उसके साथ मारपीट करते हुए दिखाया गया था. बाद में कुछ स्थानीय लोगों ने इस महिला को बचाया.

लोग पीड़ित महिला को आदिवासी मंत्री पृथ्वी मांझी के घर के गए, जहाँ इस महिला को मंत्री की पत्नी ने कपड़े और खाना दिया और डॉक्टरों से उसका उपचार कराया.

बाद में पीड़िता को मध्य असम स्थित उसके घर भेज दिया गया.

मांझी ने कहा, "हम पीड़ित महिला की पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहते, क्योंकि इससे उसकी पीड़ा और बढेगी. लेकिन इस बर्बर कृत्य को अंजाम देने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें कड़ा दंड दिया जाएगा."

न्यायिक जाँच

शनिवार को हुई हिंसा की देशव्यापी निंदा के बाद मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने इन घटनाओं की न्यायिक जाँच कराने के आदेश दिए हैं.

महिला को निर्वस्त्र करने और उसके साथ मारपीट की घटना पर प्रतिक्रिया जताते हुए गोगोई ने कहा, "यकीन नहीं होता कि लोग ऐसा पाश्विक आचरण कर सकते हैं."

हालाँकि मुख्यमंत्री ने हिंसा के लिए आदिवासियों को भी बराबर का ज़िम्मेदार बताया और कहा कि शनिवार को मारकाट की शुरुआत आदिवासियों ने ही की.

महिला के साथ मारपीट करने वालों की पहचान व्यापारी प्रसेनजीत चक्रवर्ती और उनके दो कर्मचारियों रतुल बर्मन, और संजय चकलदर के रूप में हुई है.

आदिवासी संगठनों ने शनिवार को हुई हिंसा के विरोध में सोमवार को 36 घंटे के बंद का आह्वान किया था.

असम में संथाल आदिवासी लंबे अरसे से अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की माँग कर रहे हैं.

संथाल जनजाति मूल रूप से बिहार और झारखंड से संबंध रखते हैं लेकिन ब्रिटिश शासन के दौरान इन्हें चाय बागानों में काम करने के लिए मज़दूर के तौर पर असम ले जाया गया था.