रविवार, 25 नवंबर, 2007 को 01:57 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ अब से कुछ ही मिनट पहले लाहौर हवाई अड्डे पर उतरे हैं.
सऊदी अरब से उनके साथ उनकी पत्नी कुलसुम नवाज़ और भाई शाहबाज़ शरीफ़ भी आए हैं.
नवाज़ शरीफ़ ने पाकिस्तान पहुँचने के फ़ौरन बाद बीबीसी से विशेष बातचीत में कहा कि उनकी प्राथमिकता "देश को सैनिक शासन से छुटकारा दिलाने और लोकतंत्र को मज़बूत करने की है".
अपने परिवार के तीस सदस्यों के साथ पाकिस्तान पहुँचे नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि उनका "परवेज़ मुशर्रफ़ से किसी तरह का समझौता करने का कोई इरादा नहीं है".
वे सात वर्ष निर्वासित ज़िंदगी गुज़ारने के बाद जेद्दा से एक विशेष विमान से लाहौर पहुँचे हैं.
सरकार की ओर से कहा गया है कि नवाज़ शरीफ़ अपनी मर्ज़ी से वापस लौटे हैं और उन्हें पिछली बार की तरह रोका या वापस नहीं भेजा जाएगा.
पिछले 10 सितंबर को इसी सरकार ने स्वदेश वापस लौटे नवाज़ शरीफ़ को हवाईअड्डे से ही वापस भेज दिया गया था.
चर्चा है कि सऊदी अरब के हस्तक्षेप से नवाज़ शरीफ़ और जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के बीच कोई समझौता हुआ है. हालांकि दोनों ही पक्ष इससे इनकार कर रहे हैं.
समझौता या सहमति
नवाज़ शरीफ़ के राजनीतिज्ञ भाई शाहबाज़ शरीफ़ ने दो दिन पहले ही लंदन से इस ख़बर की पुष्टि की थी कि नवाज़ शरीफ़ एक बार फिर पाकिस्तान वापस लौट रहे हैं.
पिछले कुछ दिनों से अख़बारों में नवाज़ शरीफ़, उनकी पत्नी कुलसुम शरीफ़ और भाई शाहबाज़ शरीफ़ की वापसी की ख़बरें आ रही थीं.
लेकिन इन ख़बरों को हवा तब मिली जब पिछले हफ़्ते परवेज़ मुशर्रफ़ ने अचानक सऊदी अरब का दौरा किया और वहाँ उन्होंने सऊदी अरब के शाह से मुलाक़ात की थी.
सरकार की ओर से जनरल मुशर्रफ़ के प्रवक्ता राशिद क़ुरैशी ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा, "नवाज़ शरीफ़ अपनी मर्ज़ी से लौट रहे हैं और सरकार उन्हें वापस भेजने का कोई इरादा नहीं रखती."
नवाज़ शरीफ़ और सरकार के बीच किसी डील या समझौते के सवाल पर उन्होंने कहा, "कोई डील नहीं है, जनरल मुशर्रफ़ ने सऊदी शाह से मुलाक़ात ज़रुर की थी लेकिन मैं वहाँ मौजूद नहीं था इसलिए यह कहना मुश्किल है कि क्या बात हुई थी."
उधर नवाज़ शरीफ़ की पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन एपीडीएम ने भी कहा है कि उन्हें किसी समझौते की ख़बर नहीं है.
एपीडीएम के महासचिव जावेद हाशमी ने कहा कि हो सकता है कि जनरल मुशर्रफ़ सऊदी शाह से यह कहने के लिए जेद्दा गए हों कि नवाज़ शरीफ़ को वापस आने से रोका जाए.
जेद्दा से वरिष्ठ पत्रकार राशिद हुसैन ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा, "कोई समझौता हो या न हो लेकिन कोई सहमति ज़रूर नज़र आती है."
उनका कहना है कि इस सहमति में सऊदी अरब के अलावा अमरीका और ब्रिटेन की भी भूमिका नज़र आती है.
स्वागत की तैयारी
नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के प्रवक्ता ज़फ़रूल हक़ ने कहा है कि चूंकि स्वदेश वापसी की ख़बर देर से आई है इसलिए नवाज़ शरीफ़ के स्वागत की थोड़ी बहुत तैयारी की गई है.
हालांकि स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि लाहौर में सड़कें नवाज़ शरीफ़ और शाहबाज़ शरीफ़ के पोस्टरों और बैनरों से पटी पड़ी हैं.
शहर में शनिवार की रात से ही सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं.
हालांकि माना जा रहा है कि इमरजेंसी के चलते धारा 144 लगी हुई है और वहाँ रैलियों पर प्रतिबंध है ऐसे में नवाज़ शरीफ़ का स्वागत इस बात पर निर्भर करता है कि इसे लेकर सरकार का रुख़ कैसा है.
उल्लेखनीय है कि नवाज़ शरीफ़ पिछली 10 सितंबर को पाकिस्तान लौटे थे लेकिन उन्हें वापस सऊदी अरब भेज दिया गया था.
कुछ दिन पहले पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें स्वदेश लौटने की अनुमति दे दी थी.
1999 में नवाज़ शरीफ़ का तख़्ता पलट दिया गया था और अगले साल उन्हें पाकिस्तान से सऊदी अरब निर्वासित कर दिया गया था.