शनिवार, 24 नवंबर, 2007 को 16:34 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी के उत्तर प्रदेश संवाददाता
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक अभूतपूर्व क़दम उठाते हुए उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों की निंदा की है.
इलाहाबाद हाई कोर्ट की नौ जजों वाली एक प्रशासनिक समिति ने एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें लखनऊ, वाराणसी और फ़ैज़ाबाद के न्यायालय परिसरों में हुए विस्फोटों की निंदा की गई है.
न्यायालय के एक अधिकारी ने बताया कि प्रशासनिक समिति की शुक्रवार को ही एक आपात बैठक बुलाई गई जिसमें यह प्रस्ताव पारित किया गया.
इस प्रस्ताव में धमाको में हुई मौतों पर शोक व्यक्त किया गया और राज्य सरकार से घायलों को हर सहायता मुहैया कराने का अनुरोध किया गया.
हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हेमंत लक्ष्मण गोखले ने बैठक के बाद वाराणसी में घटनास्थल का दौरा किया और अस्पतालों में घायलों का हालचाल भी पूछने गए.
न्यायालय के एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि हाई कोर्ट ने इन बम धमाकों को बहुत गंभीरता से लिया है क्योंकि ये धमाके न्याय के मंदिरों पर किए गए.
पत्रकारों को मिले एक ई-मेल में कहा गया है कि इन बम धमाकों में ख़ासतौर से वकीलों को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उन्होंने कुछ चरमपंथियों के साथ बदतमीज़ी की थी.
अदालतें सोमवार को फिर से खुलेंगी और संभावना कि वकीलों के संगठन इन बम धमाकों के विरोध में प्रदर्शन करेंगे.
उधर पुलिस इन बम धमाकों के सिलसिले में कोई सुराग़ हासिल नहीं कर पाई है लेकिन इस बात की पुष्टि हुई है कि लखनऊ में निष्क्रिय किए गए बम में आरडीएक्स विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ था.
उधर भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद के राज्यव्यापी बंद का आंशिक असर रहा है. अधिकतर जगह बंद शांतिपूर्ण रहा लेकिन कुछ जगह प्रदर्शन और छुटपुट झड़पें हुईं.
शुक्रवार को लखनऊ, वाराणसी और फ़ैज़ाबाद में हुए धमाकों में 13 लोग मारे गए और लगभग 75 लोग घायल हुए थे.