शुक्रवार, 23 नवंबर, 2007 को 16:05 GMT तक के समाचार
पाणिनी आनंद
बीबीसी संवाददाता, वाराणसी से
उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में दो धमाके हुए जिनमें पहला कचहरी परिसर में हुआ.
जब मैं वहाँ पहुँचा तो सामने पाया कि टीन शेड के चेम्बर में एक साइकिल टूट-फूटकर बिखर पड़ी थी.
घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो चुके थे. कुछ अधिवक्ता न्यायालय परिसर में नारेबाज़ी और प्रदर्शन कर रहे थे.
बारह कमरों के नए न्यायालय भवन में चारों तरफ ख़ून फैला हुआ था और लोगों के अंग बिखरे पड़े थे.
दूर-दूर तक काँच बिखरा हुआ नज़र आ रहा था. दूसरी और तीसरी मंज़िल तक के शीशे टूटकर बिखर गए थे.
कुछ अधिकारियों का अनुमान था कि बहुत ताक़तवर विस्फोटक का प्रयोग नहीं किया गया होगा.
जब धमाका हुआ तब कचहरी परिसर में ख़ासी भीड़ थी.
धमाके के तत्काल बाद के दृश्य को देखकर पुलिस को संदेह था कि संभवत: साइकिल बम का इस्तेमाल किया गया होगा.
दूसरा धमाका पीछे स्थित कलक्ट्रेट परिसर में कुछ ही समय के अंतराल के बाद हुआ था.
मैने ख़ुद अनेक लोगों को एम्बुलेंस में अस्पतालों की ओर ले जाया जा रहा था.
घटनास्थल पर मौजूद कुछ अधिकारियों का अनुमान था कि विस्फोट ख़ासे योजनाबद्ध तरीके से किए गए होंगे क्योंकि कचहरी में दोपहर में सबसे ज़्यादा भीड़ रहती है.
उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल का ये मुख्यालय है और आसपास के ज़िला मुख्यालय से भी लोग आते हैं.
आजकल शादी का मौसम भी है इसलिए आम तौर पर लोग बड़ी संख्या में बनारस में होते हैं. इस दौरान वे अपने कचहरी के काम भी निबटा लेते हैं.
26 नवंबर को मुख्यमंत्री मायावती को वाराणसी का दौरा करना है. इसी कारण शहर को काफ़ी सजाया भी जा रहा है.
मुख्यमंत्री के आने से ठीक तीन दिन पहले दोहरे विस्फोट होना यहां की सुरक्षा व्यवस्था की चुस्ती-दुरुस्ती पर प्रश्नचिह्न उठाता है.