शुक्रवार, 23 नवंबर, 2007 को 03:12 GMT तक के समाचार
चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने भारत में निर्वासन में रह रहे तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा पर बुद्ध धर्म के सिद्धांतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.
चीन की ओर से ये प्रतिक्रिया तब आई है जब उन्होंने कहा है कि वे अपना उत्तराधिकारी मनोनीत कर सकते हैं.
माना जाता है कि दलाई लामा की मृत्यु के बाद उनका पुनर्जन्म होता है लेकिन वर्तमान 14वें दलाई लामा का कहना था कि वे अगले दलाई लामा का चयन उनके जीवित रहते हुए ही हो सकता है.
लगभग 12 साल पहले दलाई लामा और चीनी प्रशासन ने दो अलग बालकों को पांचन लामा चुना था. पांचन लामा तिब्बत के बौद्धों के लिए दलाई लामा के बाद दूसरे बड़े धर्मगुरु माने जाते हैं.
लेकिन कुछ ही देर बाद जिस बालक को 14वें दलाई लामा ने पांचन लामा चुना था, वो सार्वजनिक तौर पर दिखाई देने बंद हो गया और उनकी जगह चीन की सरकार ने एक अन्य बालक को पांचन लामा बनाया था.
सदियों पुरानी परंपरा में बदलाव
हाल में 14वें दलाई लामा ने कहा था कि वे नए दलाई लामा के चुनाव के मामले में सदियों पुरानी परंपरा में बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं.
परंपरा ये है कि दलाई लामा के निधन के बाद उनका पुनर्जन्म होता है और उस बच्चे की खोज धर्मगुरू करते हैं.
मौजूदा दलाई लामा ने जापान में कहा था कि वे इस प्रक्रिया में चीनी हस्तक्षेप से बचने के उपाय खोज रहे हैं.
दलाई लामा ने जापान के एक अख़बार को दिए इंटरव्यू में कहा कि वह अपना उत्तराधिकारी अपने जीवनकाल में चुन सकते हैं या धर्मगुरुओं को यह काम सौंप सकते हैं.
चीन की रणनीति
बीबीसी संवाददाता क्रिस शाह का कहना है कि पुनर्जन्म की परंपरा में इस प्रस्तावित बदलाव के कारण चीन की कम्युनिस्ट सरकार ख़ुद को तिब्बती बौद्ध परंपरा का रखवाला दिखाने की कोशिश कर रही है.
उनका ये भी कहना है कि इस विवाद से दोनों पक्षों के बीच चल रहा राजनीतिक सत्ता का संघर्ष भी नज़र आता है.
चीन के आलोचकों का कहना है कि इस विवाद से सरकार की दीर्घकालीन नीति का भी पता चलता है.
उनका कहना है कि चीन की सरकार 72 वर्षीय वर्तमान दलाई लामा की मृत्यु का इंतज़ार करेगी और फिर अपना उम्मीदवार थोपने की कोशिश करेगी.
उस स्थिति में तिब्बत और विदेशों में बसे दलाई लामा के समर्थक चीन के चुने हुए दलाई लामा को मान्यता देने से इनकार कर सकते हैं लेकिन वे नेतृत्व से वंचित हो जाएँगे.