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गुरुवार, 22 नवंबर, 2007 को 20:40 GMT तक के समाचार

सुशीला सिंह,
बीबीसी संवाददाता, बांग्लादेश से

तूफ़ान में बचे शाहिद की कहानी

बांग्लादेश के रायदा गांव के दस वर्षीय शाहिद हलधर ने भीषण चक्रवाती तूफ़ान में मौत को क़रीब से देखा था.

इस नन्हें सिपाही की बड़ी- बड़ी आंखें बताती है उसने कैसे जिन्दगी और मौत की लड़ाई लड़ी है.

बग्लादेश के रायदा गांव के रहने वाले शाहिद कहना था कि वो भयावह मंजर वो कभी नहीं भूल सकता है. उसका कहना था कि वो उस दिन घर पर ही था पहले तेज हवाएं चली और फिर बारिश शुरु हो गई.

उसका कहना था ' मैं देख सकता था कि पेड़ गिर रहे थे. मुझे नहीं पता चला कि मेरे मां-बाप कहां चले गए. लोग पेड़ पर चढ रहे थे उन्हें देखकर मैंने भी चढने की कोशिश की लेकिन वो पेड़ उसी समय टूट गए. जैसे ही मैंने दूसरे पेड़ पर चढने की कोशिश की तो वो मुड गया. '

आप और हम उस वक्त के हालात का केवल अंदाजा ही लगा सकते है. समुद्री तूफान की रफतार 240 किलोमीटर प्रति घंटा थी.इस तूफान के सामने जो भी आया वो बर्बाद हो गया.सैकड़ों घर तबाह हो गए और हज़ारों जानें चली गईं लेकिन शाहिद ने ये ठान ली थी वो किसी भी हाल में मौत के तूफान से हार नहीं मानेगा.

उसने तीसरे पेड़ पर चढने की कोशिश की और सफल रहा. वो कहता है 'मैंने देखा की पानी मेरे सिर तक चढ आया था. मुझे बहुत डर लग रहा था लेकिन मेरी जान बच गई. मुझे अल्लाह ने बचा लिया. तूफान के बाद मेरे मां-बाप मुझे खोज रहे थे. .आज मैं बाजार आया हूं ये देखने की कि आखिर यहां हो क्या रहा है.'

शाहिद जानता है कि तूफान के बाद का ये समय उसके जीवन का सबसे कठिन दौर है लेकिन एक बार मौत को मात दे चुका शाहिद जानता है कि अब वो जिदंगी तमाम जंग जीत सकता है.