बुधवार, 21 नवंबर, 2007 को 12:56 GMT तक के समाचार
पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि उसने पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत में दो दिन की लड़ाई के दौरान कम से कम चालीस तालेबान समर्थकों को मार दिया है.
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल वहीद अरशद ने कहा कि ये विद्रोही स्वात घाटी के शंगला ज़िले में मंगलवार और बुधवार को हुई लड़ाई के दौरान मारे गए हैं.
चरमपंथियों की तरफ़ से अभी इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है और सेना के इन दावों की भी स्वतंत्र रूप से कोई पुष्टि नहीं हुई है.
पिछले सप्ताह पाकिस्तानी सेना ने कहा था कि उन्होंने स्वात घाटी में ही 16 तालेबान समर्थक चरमपंथियों को मार दिया था.
सैन्य प्रवक्ता मेजर जनरल वहीद अरशद ने समाचार एजेंसी एपी से कहा, "सैनिकों ने एक पहाड़ी पर मौजूद चरमपंथियों को लड़ाई के बाद भागने को मजबूर कर दिया है. पहाड़ी से चरमपंथी शंगला ज़िले के एक प्रमुख क़स्बे अलबुराज को जाने वाली सड़क पर नज़र रखे हुए थे."
प्रवक्ता ने कहा कि स्वात के कई इलाक़ों में बुधवार को भी लड़ाई जारी थी.
सूबा सरहद की स्वात घाटी में अक्तूबर 2007 से ही चरमपंथी गतिविधियों में ख़ासी तेज़ी देखी गई है. स्वात घाटी पाकिस्तान के क़बायली इलाक़ों के पास ही है और क़बायली इलाक़ों में जब-तब लड़ाई की ख़बरें आती रहती हैं.
स्वात घाटी में तालेबान समर्थक एक नेता मौलाना फ़ज़लुर्रहमान और उनके समर्थकों ने इस्लामी क़ानून लागू करने का आहवान किया है और उसी माहौल में वहाँ अक्तूबर 2007 से माहौल में तनाव और हिंसा की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है.
तब से चरमपंथियों ने घाटी के अनेक इलाक़ों को अपने क़ब्ज़े में ले लिया है, साथ ही कम से कम चार शहरों पर भी उनका दबदबा है.
पर्यवेक्षकों का कहना है कि उन इलाक़ों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की सीमित तैनाती की वजह से चरमपंथियों की हिम्मत बढ़ी है. हाल के दिनों में सेना और चरमपंथियों के बीच लड़ाई तेज़ हुई है जिसकी वजह से आम लोगों को भी काफ़ी नुक़सान हुआ है और बहुत से लोग वहाँ से भागने पर मजबूर हुए हैं.
राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ का कहना है कि स्वात और कुछ अन्य इलाक़ों में बढ़ती चरमपंथी गतिविधियाँ देश में तीन नवंबर को आपात लगाए जाने का एक मुख्य कारण हैं.