बुधवार, 21 नवंबर, 2007 को 08:53 GMT तक के समाचार
भारत में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने माँग की है कि नंदीग्राम के मुद्दे पर संसद का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल वहाँ जाकर स्थिति का जायज़ा ले और केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल सरकार को वहाँ स्थिति बेहतर बनाने के आदेश दे.
आडवाणी ने संसद में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, "संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत केंद्र राज्य सरकार को स्थिति बेहतर करने के लिए आदेश दे सकता है. यदि तब भी स्थिति नहीं सुधरती तो केंद्र अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल कर सकता है यानी राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है."
संसद में नंदीग्राम के मुद्दे पर दो दिन के हंगामे के बाद राजनीतिक दलों के बीच बनी सहमति के अनुसार विशेष आर्थिक ज़ोन (एसईज़ेड) के विषय को लेकर नंदीग्राम पर चर्चा हो रही है.
केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियरंजन दासमुंशी ने नंदीग्राम की स्थिति, वहाँ राजनीतिक दलों का जनाधार और उनके कुछ सहयोगियों के अनुभवों को बयान किया.
उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि विशेष आर्थिक ज़ोन की जो योजना राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने 2004 में बनाई थी उसमें ग़रीब कृषि मज़दूरों और विस्थापित होने वाले लोगों को मुआवज़ा देने की बात नहीं थी इसीलिए यूपीए सरकार ने इस बारे में क़ानून लाने का सोचा.
आतंक का माहौल
ग़ौरतलब है कि नंदीग्राम में हाल में भड़की हिंसा के बाद संसद के बाहर राज्य सरकार और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की कड़ी आलोचना हुई है.
लोकसभा में आडवाणी ने अपनी पार्टी के नेताओं की नंदीग्राम यात्रा का ज़िक्र करते हुए कहा कि बलात्कार का शिकार हुई कई महिलाओं ने अपने दर्दनाक अनुभव बयान किए और कुछ ने तो यहाँ तक कहा कि 'हमें केवल इतना बता दें कि हमारे पति ज़िंदा हैं या नहीं.'
आडवाणी ने कई बार कहा कि नंदीग्राम में 'आतंक का जो माहौल है उससे निपटने की ज़रूरत है.'
इस विषय पर आडवाणी ने बहस की शुरुआत करते हुए आरोप लगाया कि बंगाल में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ़) के प्रमुख ने कहा है कि उन्हें राज्य सरकार का सहयोग नहीं मिल रहा. आडवाणी ने ये भी कहा कि कई पत्रकारों ने उन्हें बताया कि उनके आने पर ही वे पहली बार नंदीग्राम जा पाए हैं.
उनका कहना था कि नंदीग्राम जैसी स्थितियाँ तब पैदा होती हैं जब प्रशासनिक कार्यों के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को सरकार का विकल्प बना दिया जाता है.
उन्हें राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जहाँ मुख्यमंत्री ये कह रहे हों कि ईंट का जवाब पत्थर से दिया गया वहाँ प्रशासन कैसे चलेगा.
आडवाणी का कहना था कि राज्यपाल को दिल्ली बुलाया जाए और उनसे इस बारे में पूरी जानकारी ली जाए और उच्च न्यायालय ने जो राज्य सरकार को मुआवज़ा देने संबंधी जो आदेश दिए हैं उनका भी पालन हो.
इस विषय पर लोकसभा में चर्चा अभी जारी है.