बुधवार, 21 नवंबर, 2007 को 11:36 GMT तक के समाचार
सुबीर भौमिक
बीबीसी संवाददाता, पश्चिम बंगाल
कोलकाता में नंदीग्राम की हिंसा और लेखिका तस्लीमा नसरीन की वीज़ा अवधि बढ़ाए जाने के विरोध में बुधवार को हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं.
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि राज्य सरकार ने सेना से मदद मांगी है.
अभी तक एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सहित 27 लोग घायल हो चुके हैं और क़रीब 80 लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया है.
राज्य के गृहसचिव प्रसाद रंजन रॉय ने बीबीसी को बताया कि क़ानून व्यवस्था की स्थिति को बहाल करने के लिए सेना से मदद मांगी गई है.
उधर प्रदर्शनकारियों ने पाँच वाहनों में आग लगा दी है और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एक पार्टी कार्यालय को भी जला दिया है.
विरोध की वजह
बुधवार को राज्य के एक अल्पसंख्यक समूह, ऑल इंडिया माइनॉरिटी फ़ोरम की ओर से चक्का जाम का आहवान किया गया था.
माइनॉरिटी फ़ोरम के लोग बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन को भारत से तुरंत बाहर निकाले जाने की माँग कर रहे हैं.
नब्बे के दशक की शुरुआत में ही विवाद में आईं तस्लीमा को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था. तब से तस्लीमा यूरोप और भारत निर्वासित जीवन व्यतीत कर रही हैं.
फ़ोरम ने आजकल भारत में निर्वासित जीवन बिता रही तस्लीमा के वीज़ा की अवधि बढ़ाए जाने का कड़ा विरोध किया.
इसके अलावा नंदीग्राम में पिछले दिनों हुई हिंसा को लेकर भी इस अल्पसंख्यक संगठन की ओर से विरोध दर्ज किया जा रहा है.
हिंसक प्रदर्शन
कोलकाता के पुलिस प्रमुख गौतम चक्रवर्ती ने बीबीसी को बताया, "प्रदर्शनकारियों ने कुछ स्थानों पर अपने प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंके और एसिड की बोतलें फेंकीं. इसमें पुलिस उपायुक्त समेत कई अन्य लोग घायल हो गए. हम किसी भी कीमत पर स्थिति को नियंत्रित करेंगे."
उन्होंने बताया कि जिस तरह की हिंसा बुधवार के प्रदर्शनों के दौरान हो रही है, उसे देखकर लगता है कि यह पूरी तैयारी और सोच-विचार कर किया जा रहा है.
पुलिस को कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों को संभालने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा है. आँसू गैस के गोले भी दागे गए हैं.
हिंसक प्रदर्शनों के कारण पूरे कोलकाता में यातायात की व्यवस्था ठप्प हो गई है. यहाँ तक कि मीडियाकर्मी भी इससे प्रभावित हुए हैं.
उधर ऑल इंडिया माइनॉरिटी फ़ोरम के एक वरिष्ठ नेता इदरीस अली ने बीबीसी को बताया, "राज्य में सत्तारूढ़ सीपीएम के कार्यकर्ता इस हिंसा के लिए ज़िम्मेदार हैं. हम तो शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते थे."
मार्क्सवादी नेता बिमान बोस ने माइनॉरिटी फ़ोरम के इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि उनकी पार्टी या कार्यकर्ताओं को फ़ोरम के प्रदर्शन के बारे में कोई अंदाज़ा नहीं था. फ़ोरम के लोगों ने हिंसा फैलाई है और उन्हें इसकी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए.