कर्नाटक में एक सप्ताह पुरानी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के विश्वास मत हासिल न कर पाने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का फ़ैसला किया है.
राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर की राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफ़ारिश को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्वीकार कर लिया.
मंगलवार सुबह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में राज्यपाल की सिफ़ारिश को मंज़ूरी दी गई.
इस फ़ैसले पर जल्द ही संसद की मुहर लगने के बाद विधानसभा भंग करने की कार्रवाई शुरू होगी.
सिफ़ारिश मंज़ूर
संसदीय कार्यमंत्री प्रियरंजन दास मुंशी ने संवाददाताओं से कहा, "कैबिनेट ने कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन लगाने की राज्यपाल की सिफ़ारिश को मंजूर कर लिया है. इस फ़ैसले पर संसद की मुहर लगने के बाद विधानसभा भंग करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी."
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) पार्टी की कर्नाटक इकाई के राज्य में जल्द चुनावों के सुझाव से सहमत है.
उन्होंने कहा, "हम कभी भी कर्नाटक में गठबंधन सरकार नहीं बनाना चाहते थे. हमारा मानना था कि तीन अक्तूबर के बाद कर्नाटक में स्थाई सरकार नहीं बन पाएगी."
राज्यपाल की सिफ़ारिश, बोम्मई और बिहार मामलों में अदालत के फ़ैसलों के मद्देनज़र बहुमत का फ़ैसला सदन में ही कराने का निर्णय लिया गया था.
खींचतान
कर्नाटक में पिछले दो महीनों में दूसरी बार राष्ट्रपति शासन लगा है. इसके साथ ही सत्ता हस्तांतरण को लेकर भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडी (एस) के बीच चल रहा राजनीतिक नाटक भी ख़त्म हो गया है.
भाजपा और जनता दल (एस) के बीच पिछले साल के शुरू में हुए सत्ता साझीदारी समझौते के तहत जेडीएस नेता कुमारस्वामी को 20 महीनों के लिए मुख्यमंत्री बनाया गया था.
इस वर्ष तीन अक्तूबर को यह अवधि ख़त्म होने पर जनता दल (एस) ने सत्ता हस्तांतरण से इनकार कर दिया था जिसके बाद भाजपा ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया और अल्पमत में आने के बाद एचडी कुमारस्वामी ने इस्तीफ़ा दे दिया था.
तब राज्यपाल की सिफ़ारिश पर कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन लगाया गया लेकिन तेज़ी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम में जेडीएस ने अचानक रूख़ बदला और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने का फ़ैसला किया.
आख़िरकार राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया और 12 नवंबर को भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली.
लेकिन जनता दल (एस) ने एक बार फिर पलटी मारी और सोमवार को जब येदियुरप्पा को विधानसभा में अपना बहुमत सिद्ध करना था, उससे कुछ ही घंटे पहले पार्टी ने व्हिप जारी कर अपने विधायकों को सरकार का समर्थन न करने को कहा.
इसके बाद येदियुरप्पा ने सदन में विश्वास मत का सामना किए बिना राज्यपाल को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया.