शुक्रवार, 16 नवंबर, 2007 को 09:39 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में जनवरी में होने वाले प्रस्तावित संसदीय चुनावों तक पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले मोहम्मद मियाँ सूमरो सिंध प्रांत के चर्चित राजनीतिक परिवार से आते हैं.
उनके पिता अहमद मियां सूमरो एक प्रसिद्ध सांसद थे. पाकिस्तान के विभाजन से पहले वे पश्चिमी पाकिस्तान के डिप्टी स्पीकर और सीनेट सदस्य थे.
राजनीति में कदम रखने से पहले वे पाकिस्तान और विदेशों के कई जाने-माने बैंकों में प्रमुख पदों पर रह चुके हैं.
बैंकों में प्रमुख पदों पर रहे
वर्ष 1950 में पैदा हुए मोहम्मद मियाँ सूमरो ने बीएससी की डिग्री लाहौर स्थित फ़ॉरमन क्रिस्चियन कॉलेज से हासिल की और फिर लाहौर में ही स्थित पंजाब विश्वविद्यालय से भौतिक विज्ञान में एमएससी की डिग्री हासिल की.
इसके बाद उन्होंने अमरीका में ऑपरेशन्स मैनेजमेंट में एमएससी किया और फिर पाकिस्तान और विदेशों में अनेक बैंकों में काम किया.
वे इंटरनेशनल बैंक ऑफ़ यमन के जनरल मैनेजर और फिर मुख्य कार्यकारी बने. वह फ़ैसल इस्लामिक बैंक ऑफ़ बहरीन और बैंक ऑफ़ अमेरिका में भी अहम ओहदों पर रह चुके हैं.
जनरल मुशर्रफ़ ने उन्हें मई 2000 में सिंध प्रांत का गवर्नर नियुक्त किया और तभी उनकी सियासी जिंदगी की शुरुआत हुई.
उन्होंने सीनेट का सदस्य बनने के लिए चुनावों में हिस्सा लेने के लिए दिसंबर 2000 में गवर्नर के पद से इस्तीफ़ा दिया और फ़रवरी 2003 में सीनेटर बने. मार्च 2003 में वे सीनेट के चेयरमैन चुने गए.
पर्यवेक्षकों का मानना है कि जनरल मुशर्रफ़ चाहते थे कि ऐसा व्यक्ति सीनेट का चेयरमैन होना चाहिए जिसकी कोई ख़ास राजनीतिक महत्वाकांक्षा न हो. ऐसा इसलिए भी क्योंकि जब राष्ट्रपति विदेशों के दौरे पर जाते हैं तो सीनेट के चेयरमैन ही कार्यवाहक राष्ट्रपति होते हैं.
इसलिए टीकाकारों का मानना है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को सूमरों सीनेट के चेयरमैन के रूप में भाते थे.
सूमरो के बारे में कहा जाता है कि वे ठंडे स्वभाव के हैं और सीनेट की कार्यवाही के दौरान माहौल गर्म होने के बावजूद उन्होंने ख़ासा धीरज दिखाया.
उनके बारे में ये भी कहा जाता है कि वे राजनीतिक बयानबाज़ी से गुरेज़ करते हैं.