शुक्रवार, 16 नवंबर, 2007 को 14:09 GMT तक के समाचार
कोलकाता उच्च न्यायालय ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो से नंदीग्राम में 14 मार्च 2007 को हुई पुलिस फ़ायरिंग के बारे में एक महीने के भीतर रिपोर्ट मांगी है.
स्थानीय संवाददाता अमिताभ भट्टासाली के अनुसार अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि इस घटना में मारे गए हर व्यक्ति के परिजनों को पाँच लाख रुपए का मुआवज़ा दिया जाए.
इस घटना में 14 लोग मारे गए थे.
इसके अलावा जिन महिलाओं ने बलात्कार होने का आरोप लगाया था और जो लोग बुरी तरह घायल हुए है, उन्हें दो-दो लाख रुपए का मुआवज़ा देने का आदेश दिया गया है.
उच्च न्यायालय की खंडपीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायाधीश एसएस निज्जर ने सरकार के उस तर्क को ख़ारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि पुलिस को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी.
अदालत ने सीबीआई से कहा कि घटना की विस्तृत जाँच होनी चाहिए ताकि पता चले कि इसमें किन लोगों का हाथ था और दोषियो के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए.
'आदेश का पालन करना होगा'
इससे पहले कोलकाता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) को आदेश दिया था कि वह मार्च 14 को पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में हुई पुलिस फ़ायरिंग की घटना पर एक हफ़्ते के भीतर रिपोर्ट दायर करे.
लेकिन इस भीतर इस मामले में लगभग दस जनहित याचिकाएँ दायर की गई हैं और जुलाई के महीने में इनकी सुनवाई हुई थी.
राज्य सरकार ने अदालत में दायर किए अपने हलफ़नामें में नंदीग्राम में हुई पुलिस फ़ायरिंग को सही ठहराया था.
पश्चिम बंगाल के गृह सचिव पीआर रॉय ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "सरकार को मुआवज़े के बारे में अदालत के आदेश का पालन करना ही होगा."