गुरुवार, 15 नवंबर, 2007 को 17:25 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने संसद के ऊपरी सदन सीनेट के चेयरमैन मोहम्मद मियाँ सूमरो को देश का कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया है.
वे नौ जनवरी से पहले होने वाले संसदीय चुनाव तक इस पद पर रहेंगे.
पंद्रह नवंबर से पाकिस्तान की नेशनल असेंबली भंग हो गई है जिसके बाद प्रधानमंत्री शौक़त अज़ीज़ प्रधानमंत्री के पद पर नहीं रह सकते थे इसलिए कार्यवाहक प्रधानमंत्री की नियुक्ति की गई.
विपक्ष ने मोहम्मद मियाँ सूमरो की नियुक्ति के निर्णय का विरोध किया है.
उनका कहना है कि पाकिस्तान में होने वाले चुनावों की कोई विश्वसनीयता नहीं है क्योंकि वे इमरजेंसी के दौरान ही होंगे.
इससे पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने प्रोविज़नल कॉन्स्टीट्यूशनल ऑर्डर (पीसीओ) में एक संशोधन किया है जिसके मुताबिक़ देश से इमरजेंसी हटाने का ऐलान सिर्फ़ राष्ट्रपति ही कर सकता है, कोई अन्य व्यक्ति नहीं.
कहा गया है कि परवेज़ मुशर्रफ़ जल्द ही सेनाध्यक्ष का पद छोड़ने वाले हैं और भविष्य कोई भ्रम न पैदा हो इसलिए उन्होंने यह संशोधन किया है.
इससे पहले पाकिस्तान के एटॉर्नी जनरल मलिक कयूम ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि परवेज़ मुशर्रफ़ इस महीने के अंत तक सेनाध्यक्ष का पद छोड़ देंगे.
उन्होंने कहा कि जैसे ही सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला उनके पक्ष में आएगा वे राष्ट्रपति पद की शपथ ले लेंगे और सेनाध्यक्ष का पद छोड़ देंगे.
विपक्ष और सुनवाई
पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो ने कहा है कि आम चुनावों से पहले देश में एक राष्ट्रीय सहमति वाली सरकार बननी चाहिए जो परवेज़ मुशर्रफ़ सरकार की जगह ले.
लाहौर में नज़रबंद बेनज़ीर भुट्टो ने कहा है कि इस मुद्दे पर वह विपक्षी नेताओं से बातचीत कर रही हैं ताकि उन्हें एक मंच पर इकट्ठा किया जा सके.
पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने भी कहा है कि एक गठबंधन बनाने के लिए वह भी नेताओं से बातचीत कर रहे हैं.
परवेज़ मुशर्रफ़ ने देश में तीन नवंबर को आपातकाल लगाने के बाद सुप्रीम कोर्ट के अनेक जजों को बर्ख़ास्त कर दिया है और अनेक को नज़रबंद कर दिया है जिनमें मुख्य न्यायाधीश इफ़्तेख़ार मोहम्मद चौधरी भी हैं.
बेनज़ीर ने मुशर्ऱफ़ के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय सहमति बनाने का आहवान किया है
उनकी जगह अन्य जजों की नियुक्ति की गई है. आपातकाल लागू करने के फ़ैसले की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में गुरूवार को सुनवाई शुरू हुई है.
बीबीसी संवाददाता जॉन सडवर्थ का कहना है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के वकीलों का तर्क होगा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए इमरजेंसी लगाना ज़रूरी था.