बुधवार, 14 नवंबर, 2007 को 12:04 GMT तक के समाचार
फ़ैसल मोहम्मद अली
बीबीसी संवाददाता, मध्य प्रदेश
भोपाल की एक अदालत ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी पत्नी समेत छह लोगों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के एक मामले में जाँच के आदेश दिए हैं.
अदालत ने राज्य के लोकायुक्त को दिए निर्देशों में इस मामले की जाँच रिपोर्ट जल्द से जल्द पेश करने को कहा है.
अदालत ने एक याचिका की सुनवाई के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उनकी पत्नी साधना सिंह और चार अन्य लोगों के ख़िलाफ़ जाँच के आदेश दिए.
दरअसल, मुख्यमंत्री की पत्नी के ख़िलाफ़ हाल ही में फ़र्ज़ी दस्तावेजों के आधार पर वाहन खरीदने का मामला सामने आया था.
इसके बाद विपक्षी पार्टी कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दलों ने मुख्यमंत्री से इस्तीफ़े की माँग की थी.
विपक्ष की नेता जमुना देवी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी गईं थीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका इस आधार पर ख़ारिज़ कर दी थी कि इस मामले की सुनवाई पहले निचली अदालत में होनी चाहिए.
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह का कहना है कि अगर अदालत में एक मामला दर्ज होने पर भारतीय जनता पार्टी उमा भारती को मुख्यमंत्री पद से हटा सकती है तो फिर शिवराज सिंह के साथ ऐसा क्यों नहीं किया जाना चाहिए.
मामला
दरअसल, भारतीय जनशक्ति पार्टी के महासचिव प्रहलाद पटेल ने कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूछा था कि रीवा में दो करोड़ की गाड़ियों की ख़रीदार साधना सिंह कौन हैं.
कागजों में साधना सिंह के पति का नाम एसआर सिंह और पता जेपी नगर, रीवा बताया गया था. इसके बाद से ही मुख्यमंत्री पर ग़लत पता देने और सही जानकारी छिपाने का आरोप लग रहा है.
शिवराज सिंह पहले तो इस पूरे मामले में चुप्पी साधे रहे, लेकिन फिर उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में भारी वाहनों को ख़रीदने और फिर बेचे जाने की बात स्वीकार कर ली.
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर उनका परिवार व्यवसाय करता है तो इसमें कुछ ग़लत नहीं है.
भाजपा की राज्य इकाई भी पहले इन आरोपों को तथ्यहीन कह रही थी लेकिन अब वह भी मुख्यमंत्री की बातों को ही दोहरा रही है.
भाजपा की राज्य इकाई के प्रवक्ता उमा शंकर गुप्ता कहते हैं, "व्यापार करने का अधिकार सबको है. सब कुछ रिकॉर्ड में मौजूद है. इसलिए किसी को भी कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए."