बुधवार, 14 नवंबर, 2007 को 12:17 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में लाहौर की पुलिस ने कहा है कि पूर्व क्रिकेटर और विपक्षी नेता इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ आतंकवाद विरोधी क़ानून के तहत मुक़दमा चलाया जाएगा.
मंगलवार को उन्हें एक राजनीतिक रैली से गिरफ़्तार कर लिया गया था.
पुलिस ने कहा है कि उन पर नफ़रत फैलाने और अशांति भड़काने के आरोप के तहत मुक़दमा चलेगा. पहले ही घोषणा की जा चुकी है कि वे अगले 90 दिनों तक नज़रबंद रहेंगे.
लाहौर के एक पुलिस अधिकारी मलिक मोहम्मद इक़बाल ने बताया, "इमरान ख़ान को विश्वविद्यालय परिसर के दरवाज़े पर हिरासत में लिया गया."
इमरान ख़ान बुधवार को जैसे ही विश्वविद्यालय परिसर पहुँचे तो कार से निकलते ही उन्हें लगभग 200 छात्रों ने उत्साह के साथ अपने कंधों पर उठा लिया.
एक छात्र फ़ैसल नईम का कहना था, "तभी कुछ लोग आए और इमरान ख़ान को अपने साथ ले गए. जब उन लोगों ने इमरान को पकड़ा तो उस समय इमरान ख़ान मेरे कंधों पर थे."
इमरान ख़ान ने मंगलवार को कहा था कि जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ कोई बातचीत नहीं होनी चाहिए.
छात्र फ़ैसल नईम का कहना था कि वह उन लोगों नहीं पहचान सका जो इमरान ख़ान को पास की एक इमारत में ले गए क्योंकि वे सादे कपड़े पहने हुए थे.
इमरान ख़ान की तहरीके इंसाफ़ पार्टी की पंजाब में प्रवक्ता नसीम ज़ोहरा ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों ने इमरान ख़ान को हिरासत में लेने के लिए कुछ धार्मिक छात्रों का सहारा लिया. इमरान ख़ान को एक सफ़ेद वैन में बिठाकर ले जाया गया.
नसीम ज़ोहरा ने कहा, "मुझे सही तरह से मालूम नहीं कि क्या हुआ. कुछ लोग इमरान ख़ान को अपने साथ ले गए लेकिन कहाँ ले गए यह नहीं मालूम है."
लाहौर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ख़ालिद भट्टी का कहना है कि "इमरान ख़ान पुलिस हिरासत में हैं. उन्हें हिरासत में लेने के आदेश थे जिनके बारे में उन्हें बता दिया गया. हम उन्हें 90 दिनों के लिए नज़रबंद करने जा रहे हैं."
'आपातकाल में चुनाव'
इमरान ख़ान ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि वह पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की इस बात से सहमत हैं कि अगर आम चुनाव आपातकाल के दौरान ही कराए जाते हैं तो उनका कोई मतलब नहीं होगा.
इमरान ख़ान ने कहा था, "मुझे ख़ुशी है कि देश की सभी विपक्षी पार्टियाँ इस मुद्दे पर एकमत हैं और इसका अर्थ निकलता है कि फौजी तानाशाह के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए."
इमरान ख़ान का कहना था, "इन हालात में यह संभव ही नहीं है कि हम चुनाव लड़ सकें इसलिए जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ से हम क्या चाहतें हैं... वे इस्तीफ़ा दें, न्यायपालिका बहाल करें और फिर चुनाव कराएँ."