बुधवार, 14 नवंबर, 2007 को 18:44 GMT तक के समाचार
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में जारी हिंसा के विरोध में बुधवार को कोलकाता में बुद्धिजीवियों ने एक शांतिमार्च का आयोजन किया.
इन बुद्धिजीवियों ने नंदीग्राम की हिंसा को 'जनसंहार' बताते हुए वहाँ शांति स्थापना की माँग की है.
लेखकों, फ़िल्मकारों, अभिनेताओं, चित्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की इस रैली में मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य के उस बयान की भी निंदा की गई जिसमें उन्होंने सीपीएम के कार्यकर्ताओं की हिंसा को सही ठहराया था.
उल्लेखनीय है कि बुद्धदेब भट्टाचार्य ने मंगलवार को कहा था कि हिंसा पहले विपक्ष ने की थी और सीपीएम कार्यकर्ताओं की हिंसा तो उसका जवाब भर थी.
इस बीच नंदीग्राम से ख़बरें मिल रही हैं कि वहाँ तैनात किए गए केंद्रीय सुरक्षा बल सीआरपीएफ़ को स्थानीय पुलिस से सहायता नहीं मिल रही है और वह पूरी तरह काम नहीं कर पा रहा है.
शांति-मार्च
बीबीसी संवाददाता अमिताभ भट्टाशाली के अनुसार इस शांति मार्च में कोई बीस हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया.
तीन किलोमीटर से भी अधिक लंबी इस रैली में फ़िल्मकार मृणाल सेन, गौतम घोष और अपर्णा सेन, चित्रकार जोगेन चौधरी और सुवा प्रसन्ना, उपन्यासकार शीर्षेन्दु मुखर्जी, लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता महाश्वेता देवी सहित कई विभिन्न क्षेत्र के प्रमुख हस्तियों ने हिस्सा लिया.
इस मौन रैली में प्रदर्शनकारी पोस्टर और बैनर लिए हुए थे जिसमें नंदीग्राम में हिंसा का विरोध किया गया था और इसे 'जनसंहार' भी कहा गया था.
समाचार एजेंसी यूएनआई के अनुसार फ़िल्मकार अपर्णा सेन और गौतम घोष ने इसे ऐतिहासिक रैली बताते हुए कहा है कि यह एक ग़ैर-राजनीतिक विरोध प्रदर्शन था.
गौतम घोष ने मुख्यमंत्री बुद्धदेब के बयान की निंदा करते हुए कहा है कि राज्य के मुख्यमंत्री को इस भाषा का उपयोग नहीं करना चाहिए.
पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा, "एक सामान्य राजनीतिज्ञ तो अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए 'हम' और विपक्षी दलों के लिए 'उनका' जैसे संबोधनों का प्रयोग कर सकते हैं लेकिन एक मुख्यमंत्री ऐसा नहीं कर सकते."
जवाबी रैली
हालांकि बुद्धिजीवियों ने इस विरोध प्रदर्शन को ग़ैर राजनीतिक कहा है लेकिन इसके बाद ही गुरुवार को एक और रैली निकाले जाने की घोषणा की गई है.
इस रैली में भी विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हुए बुद्धिजीवियों के भाग लेने की संभावना है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जिन बुद्धिजीवियों के नाम इस रैली के लिए दिए गए हैं वे आमतौर पर सरकार के समर्थक माने जाते हैं और इस रैली का उद्देश्य सरकार पर दबाव बनाना नहीं बल्कि सरकार का समर्थन करना होगा.
इसके अलावा गुरुवार को एक विरोध प्रदर्शन और आयोजित किया गया है जिसमें कोलकाता में चल रहे अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह का विरोध किया जाएगा.
तनाव क़ायम
अधिकारियों का कहना है कि नंदीग्राम में शांति है लेकिन तनाव क़ायम है.
सीआरपीएफ़ ने जगह-जगह फ्लैग मार्च किया है.
लेकिन ख़बरें आ रही हैं कि सीआरपीएफ़ ने अभी तक अपने पाँच कैंप भी ठीक तरह से स्थापित नहीं किए हैं और इसकी वजह से उसका कामकाज पूरी तरह शुरु नहीं हो पाया है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सीआरपीएफ़ के अधिकारी अनौपचारिक बातचीत में स्वीकार कर रहे हैं कि वहाँ स्थानीय पुलिस से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है.
अधिकारियों का कहना है कि सीआरपीएफ़ के जवान फ़्लैग मार्च ज़रुर कर रहे हैं लेकिन वे अभी भी इंतज़ाम में लगे हुए हैं और छापामारी जैसे काम नहीं कर पा रहे हैं.