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बुधवार, 14 नवंबर, 2007 को 16:39 GMT तक के समाचार

क्रिस मॉरिस
बीबीसी संवाददाता, लाहौर से

अमन क़ायम होते ही हट जाऊँगाः मुशर्रफ़

पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ का कहना है कि वर्तमान संकट के दौरान वह अपने पश्चिमी मित्र देशों के रवैये से बिलकुल ख़ुश नहीं थे और उन्होंने इस्तीफ़ा देने का इरादा कर लिया था.

लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वह तानाशाह नहीं हैं.

विदेशी मीडिया चैनेलों को दिए अलग-अलग इंटरव्यू में जनरल मुशर्रफ़ ने विपक्ष के इन दावों से इनकार किया कि इमरजेंसी के दौरान चुनाव का कोई मतलब नहीं हैं.

उनका कहना था कि वही वह शख़्स हैं जो पाकिस्तान को लोकतंत्र के रास्ते पर वापस ले जा सकते हैं.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति का कहना था, "जिस दिन पाकिस्तान में शांति क़ायम हो जाएगी, मैं अपने पद से हट जाऊँगा".

लेकिन, फ़िलहाल वह राष्ट्रपति भी रहेंगे और सेनाध्यक्ष भी. उनके विरोधी या तो नज़रबंद हैं या निष्कासन में हैं.

विरोधी गिरफ़्तार या निष्कासित

पूर्व क्रिकेटर इमरान ख़ान को उस समय गिरफ़्तार कर लिया गया जब वह लाहौर में एक रैली को संबोधित करने जा रहे थे.

इमरजेंसी लागू होने के बाद से वह कहीं छिपे हुए थे. कहा जा रहा है कि उन्हें पाकिस्तान में व्यापक जनसमर्थन हासिल नहीं है और उन्हें एक क्रिकेटर के तौर पर ही ज़्यादा जाना जाता है.

दूसरी और बेनज़ीर भुट्टो पहले ही नज़रबंद की जा चुकी हैं. उन्होंने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से मांग की है कि वह सत्ता छोड़ दें.

बीबीसी से फ़ोन पर एक बातचीत में उन्होंने कहा कि मुशर्रफ़ स्थितियों को समझ पाने और काबू कर पाने में विफल हो गए हैं और अब उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

बेनज़ीर इस समय लाहौर में अपनी पार्टी के एक नेता के घर पर नज़रबंद हैं. इस घर के इर्द-गिर्द सोमवार रात से ही पुलिस की बड़ी तादाद में तैनाती कर दी गई है.

इस घर के आसपास के लगभग एक किलोमीटर के दायरे में किसी भी व्यक्ति के आने-जाने पर रोक लगा दी गई है और रास्ते बंद कर दिए गए हैं

इसी बीच, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि जब तक बर्ख़ास्त मुख्य न्यायाधीश और अन्य जजों को बहाल नहीं किया जाता, 'तब तक देश में चुनावों की बात न तो सुननी चाहिए और न ही माननी चाहिए.