मंगलवार, 13 नवंबर, 2007 को 09:23 GMT तक के समाचार
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में तैनात नैटो के सैन्य बलों को चाहिए कि वे क़ैदियों को अफ़ग़ानिस्तान के अधिकारियों को सौंपना रोक दें क्योंकि वहाँ कुछ क़ैदियों को यातनाएँ दी जा रही हैं.
एमनेस्टी का आरोप है कि उसके पास बार-बार ऐसी रिपोर्ट आई है कि क़ैदियों को कोड़े लगाए जाते हैं. एमनेस्टी ने ये भी कहा है कि क़ैदियों को भूखा रखा जाता है और ठंड में ठिठुरने के लिए छोड़ दिया जाता है.
अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत यदि क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार होने का शक़ हो तो उन्हें किसी सरकार को नहीं सौंपा जा सकता.
एमनेस्टी का कहना है कि जब तक अफ़ग़ानिस्तान की इंटेलिजेंस सर्विस यानी गुप्तचर सेवा क़ैदियों के साथ बुरे व्यवहार को रोकने के लिए पुख़्ता कदम नहीं उठाती है तब तक क़ैदियों को अफ़ग़ानिस्तान के अधिकारियों को नहीं सौंपना चाहिए.
मानवाधिकार
नैटो के नेतृत्व में काम कर रही अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल (आईएसएफ) के कुछ सदस्य देशों का अफ़ग़ानिस्तान प्रशासन के साथ 'समझौता' है.
इस समझौते के तहत तबादले में लाए गए क़ैदियों के साथ अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के तहत व्यवहार को सुनिश्चित करना शामिल है. 'समझौता' करने वाले देशों में यूके, नीदरलैण्ड, कनाडा भी हैं.
लेकिन आईएसएफ़ के प्रवक्ता जेम्स अप्पाथुरई का कहना है, "अफ़ग़ानिस्तान एक संप्रभु देश है...और अफ़ग़ान क़ैदियों को हिरासत में रखने की क़ानूनी ज़िम्मेदारी उसी की है."
उनका ये भी कहना है, "देश के क़ानून से अलग क़ैदियों के लिए एक समानांतर संरचना खड़ी करना नैटो का काम नहीं है."