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सोमवार, 12 नवंबर, 2007 को 03:54 GMT तक के समाचार

पाँच सदस्यीय मंत्रिमंडल ने शपथ ली

कर्नाटक में भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. उनके अलावा भाजपा के चार विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली.

इसी के साथ पहली बार किसी दक्षिण भारतीय राज्य का मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी का नेता बना है.

पिछले कुछ हफ़्तों से चले आ रहे राजनीतिक संकट के बाद राज्य में पिछले 34 दिनों से चला आ रहा राष्ट्रपति शासन भी समाप्त हो गया.

हालांकि जेडीएस के नेताओं ने अभी तक न तो उप मुख्यमंत्री का नाम घोषित किया है और न ही नए मंत्रिमंडल में शामिल हुए हैं.

राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर ने येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई, जबकि गोविंद एम करजोल, वीएस आचार्य, जगदीश शेत्तार और आर अशोक ने कैबिनेट मंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली.

येदियुरप्पा कर्नाटक के 25वें मुख्यमंत्री हैं. भाजपा किसी दक्षिण भारतीय राज्य में पहली बार सरकार बनाने में सफल रही है.

ऐतिहासिक मौक़ा

इस ऐतिहासिक मौके पर भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह, लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा, एम वेंकैया नायडू और अनंत कुमार भी मौजूद थे.

हालाँकि आज शपथ लेने वाले सभी मंत्री भाजपा के हैं, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की सहयोगी पार्टी जनता दल (सेक्युलर) के विधायक दल के नेता चुने गए एचडी कुमारस्वामी ने शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेकर ये संकेत दिया कि गठबंधन एकजुट है.

जेडीएस ने रविवार को कहा था कि वह चाहता है कि उसके सभी 18 मंत्री और उप मुख्यमंत्री 19 नवंबर या 21 नवंबर को शपथ लें.

जेडीएस की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी को विधायक दल का नेता चुन लिया गया पर अभी यह नहीं बताया गया है कि उप मुख्यमंत्री पद के लिए किसके नाम प्रस्तावित किया जाएगा.

स्थिरता पर सवाल

जानकारों का मानना है कि भले ही कर्नाटक में जेडीएस और भाजपा के बीच बना गतिरोध ख़त्म हो गया दिखता हो पर अभी भी जोड़-जुगत का दौर थमा नहीं है.

ग़ौरतलब है कि पिछले सप्ताह गुरुवार को राज्य से राष्ट्रपति शासन हटा लिए जाने के फ़ैसले के बाद ही जनता दल-सेक्युलर (जेडीएस) के समर्थन से भाजपा की अगुआई में सरकार गठन का रास्ता साफ हो गया था.

कर्नाटक के राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर ने केंद्र सरकार को भेजी रिपोर्ट में भाजपा-जेडीएस गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने की अनुशंसा की थी.

उनकी रिपोर्ट पर विचार के बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन हटाने का निर्णय लिया.

उल्लेखनीय है कि एचडी देवेगौड़ा के नेतृत्व वाले जेडीएस और भाजपा का गठबंधन सात अक्तूबर तक सत्ता में था. लेकिन समझौते के अनुसार मुख्यमंत्री बदले जाने के विवाद के चलते गठबंधन टूट गया और भाजपा ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया.

इसके बाद राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर ने वहाँ राष्ट्रपति शासन की सिफ़ारिश कर दी थी.

लेकिन इस बीच राजनीतिक हालात फिर बदल गए और जनता दल (एस) भाजपा को समर्थन देने के लिए तैयार हो गया.

गत 29 अक्तूबर को जेडीएस और भाजपा के 129 विधायक राज्यपाल के सामने पेश हुए थे और उन्हें अपनी बहुमत दिखाकर राष्ट्रपति शासन हटाने की माँग की थी.

इसके बाद छह नवंबर को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के सामने भाजपा-जेडीएस के नेताओं ने 128 विधायकों की परेड करवाई थी और उनसे राष्ट्रपति शासन ख़त्म करने का अनुऱोध किया था.

भाजपा और जेडीएस के बीच आधे-आधे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री पद संभालने का समझौता हुआ था जिसके तहत पहले जेडीएस के कुमारस्वामी ने 20 महीने के लिए मुख्यमंत्री का पद संभाला था.

बाद में उन्होंने भाजपा के येदियुरप्पा को पद देने से इनकार कर दिया था.