शनिवार, 10 नवंबर, 2007 को 14:12 GMT तक के समाचार
सुबीर भौमिक
बीबीसी संवाददाता, कोलकाता
त्रिणामूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में जारी हिंसा के विरोध में अपनी संसद सदस्यता त्याग दी है उधर राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच वाकयुद्ध चल रहा है.
ममता बनर्जी नंदीग्राम में किसानों की ज़मीन अधिग्रहण करने के सरकारी फ़ैसले के ख़िलाफ़ भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी (बीयूपीसी) का समर्थन कर रही हैं. यह संगठन किसानों की ज़मीन अधिगृहीत किए जाने के ख़िलाफ़ आंदोलन चला रहा है.
ममता बनर्जी ने शनिवार को संसद सदस्यता से इस्तीफ़ा देने की घोषणा करते हुए नंदीग्राम मुद्दे पर "अनिश्चिकाल विरोध प्रदर्शन" जारी रखने का आहवान किया है.
उन्होंने चेतावनी दी है कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता सोमवार से राज्य भर में "सामान्य कामकाज बिल्कुल ठप" कर देगी.
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ़ इंडिया ने नंदीग्राम में जारी हिंसा के विरोध में भी सोमवार से 24 घंटे के राज्यव्यापी बंद का आहवान किया है.
इस बीच नंदीग्राम में हालात और ख़राब होते नज़र आ रहे हैं क्योंकि वहाँ बीयूपीसी के कार्यकर्ताओं और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थकों के बीच शनिवार को ताज़ा झड़पें हुई हैं जिनमें कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और बीस से ज़्यादा घायल हुए हैं.
हालाँकि अभी यह पता नहीं चल सका है कि गोलीबारी की शुरूआत किस तरफ़ से हुई.
उधर सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को नंदीग्राम जाने की इजाज़त नहीं दी गई है और वह दो दिन की भूख हड़ताल पर हैं.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीआरपीएफ़ की एक बटालियन नंदीग्राम के लिए रवाना की है.
आमने-सामने
उधर नंदीग्राम की स्थिति को लेकर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और सरकार के बीच तनातनी का माहौल नज़र आ रहा है. जहाँ राज्यपाल ने राज्यसरकार की आलोचना की है वहीं वाम गठबंधन ने राज्यपाल पर पक्षपात का आरोप लगाया है.
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल गोपाल कृष्ण गाँधी ने राज्य नंदीग्राम में जारी हिंसा न रोक पाने के संदर्भ में राज्य सरकार की आलोचना करते हुए वहाँ की स्थिति को चरम पर बताया है.
इसके जवाब में राज्य में सत्तारूढ़ वाम गठबंधन के प्रमुख बिमान बोस ने कहा है कि राज्यपाल अपनी मर्यादा का उल्लंघन कर रहे हैं.
वामनेता ने राज्यपाल पर पक्षपातपूर्ण रवैया रखने का आरोप भी लगाया है.
शुक्रवार की रात जारी बयान में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी ने कहा, "नंदीग्राम में बड़ी संख्या में हथियारबंद लोग मौजूद हैं. हज़ारों ग्रामीण अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं. नंदीग्राम युद्धक्षेत्र में तब्दील हो गया है."
उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, "कोई भी सरकार या समाज ऐसे किसी युद्धक्षेत्र को बने रहने की अनुमति नहीं दे सकती है, वो भी बिना किसी तत्काल और प्रभावी कार्रवाई के."
हमले का विरोध
उधर मेधा पाटकर ने भूख हड़ताल की घोषणा कर दी है.
उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा है कि जबतक उन्हें नंदीग्राम में जाने नहीं दिया जाता है तबतक उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी.
मेधा पाटकर नंदीग्राम जाने का प्रयास कर रही थीं जब गुरुवार को उनपर कथित रूप से हमला होने की घटना सामने आई थी.
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर पर कथित हमले की सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने निंदा की थी लेकिन उनके रवैए को 'पक्षपातपूर्ण' बताया था.
नंदीग्राम में पिछले एक सप्ताह से भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रही 'भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति' के समर्थकों और सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़पों के बाद वहाँ गहरा तनाव बना हुआ है.
दोनों गुटों के बीच हुई हिंसा में पाँच लोगों की मौत हो चुकी है और 30 से ज़्यादा लोग घायल हो गए हैं.