मंगलवार, 06 नवंबर, 2007 को 14:12 GMT तक के समाचार
फ़ैसल मोहम्मद अली
बीबीसी संवाददाता, भोपाल
भोपाल सेंट्रल जेल के कुछ मुस्लिम क़ैदियों ने अपने परिजनों से शिकायत की है कि जेल प्रशासन ने उनके दाढ़ी रखने और टोपी लगाने पर पाबंदी लगा दी है.
यह भी कहा जा रहा है की जेल अधिकारियों ने यहाँ सज़ा काट रहे कुछ बंदियों की दाढ़ी कटवा दी है.
हालांकि क़ैदियों या उनके परिजनों ने अब तक इसकी कोई औपचारिक शिकायत किसी अधिकारी से नहीं की है लेकिन ऐसे मामले भोपाल की कुछ मुस्लिम संस्थाओं के सामने बार-बार आते रहे हैं.
इन संस्थाओं का कहना है की परिजन अधिकारियों के ख़िलाफ़ शिकायत कर क़ैदियों को 'मुसीबत' में नहीं डालना चाहते.
जेल अधीक्षक पीडी सोमकुंवर ने अपने एक बयान में कबूल किया है कि दो विचाराधीन कैदियों की शिनाख़्त बरकरार रखने के लिए उन्हें दाढ़ी बढ़ाने से रोका गया था.
'धार्मिक आज़ादी पर हमला'
जेल अधीक्षक ने बीबीसी से कहा, ''टोपी पहनने पर किसी तरह की रोक की बात ग़लत है. जब क़ैदी जेल में आते हैं तो उनकी एक तस्वीर खींची जाती है जो जेल से छूटते समय उनके चेहरे से मिलाई जाती है. इसलिए इस बीच अगर किसी क़ैदी ने दाढ़ी बढ़ाने के कोशिश कि होगी तो अधिकारियों ने उन्हें मना किया होगा.''
लेकिन राज्य अल्पसंख्यक आयोग जेल अधिकारी के इस जवाब से संतुष्ट नहीं है.
आयोग के अध्यक्ष अनवर मोहम्मद ख़ान का कहना है, ''अगर जेल अधीक्षक का यही जवाब पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस पर लागू हो जाए तो कोई व्यक्ति जीवन भर अपने चेहरे में तब्दीली ही नहीं कर सकता.''
उन्होंने कहा कि जो मुसलमान अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसरण के लिए दाढ़ी बढ़ाते हैं उनके इस काम किसी तरह का अड़चन लगाया जाना उनकी धार्मिक आज़ादी पर कुठाराघात है.
आयोग इस मामले में जेल प्रशासन को एक नोटिस भी भेजने जा रहा है और इसके बाद वह मामले की जाँच कर एक रिपोर्ट शासन को भेजेगा.
इस मामले को लेकर कुछ मुस्लिम संस्थाओं ने भोपाल में एक बैठक भी कि है और वे इस पूरे मामले की जाँच करवाए जाने का इरादा कर रहे हैं.