सोमवार, 05 नवंबर, 2007 को 03:48 GMT तक के समाचार
अमरीका ने कहा है कि पाकिस्तान में आपातकाल लगाने के निर्णय के मद्देनज़र अमरीका की ओर से उसे दी जा रही आर्थिक मदद की समीक्षा की जाएगी.
इस बारे में बताते हुए अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा है कि वाशिंगटन अब इस बात की समीक्षा करेगा कि क्या आपातकाल लागू किए जाने के बाद भी पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद जारी रखी जाए.
ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान को अमरीका की ओर से कई अरब अमरीकी डॉलर की आर्थिक मदद लगातार दी जाती रही है पर आपातकाल के बाद अब इसपर पुनर्विचार की बात कही जा रही है.
शनिवार को पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने देशभर में आपातकाल लागू करने की घोषणा कर दी थी.
उनके इस क़दम की दुनिया के कुछ देशों ने निंदा की है और कहा है कि पाकिस्तान को लोकतंत्र बहाली की ओर बढ़ना चाहिए था न कि आपातकाल की ओर.
पाकिस्तान में इमरजेंसी लागू किए जाने के कुछ देर बाद की गई टिप्पणी में उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में आपातकाल लागू किया जाना 'बेहद अफ़सोस की बात' है.
आर्थिक मदद
हालांकि अमरीकी विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद का एक बड़ा हिस्सा अल क़ायदा और तालेबान चरमपंथियों के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे अभियान के लिए दिया जाता है.
अमरीकी राष्ट्रपति की प्राथमिकताओं में आतंक के ख़िलाफ़ अभियान को वरीयता दी गई है और इसी के तहत पाकिस्तान को आर्थिक मदद दी जाती रही है ताकि चरमपंथी ताकतों से निपटने में मदद मिल सके.
पिछले पाँच वर्षों में अमरीका ने पाकिस्तान को लगभग 10 अरब अमरीकी डॉलरों की आर्थिक सहायता मुहैया कराई है.
आर्थिक सहायता पर पुनर्विचार के संदर्भ में अमरीका ने यह भी कहा है कि इस बारे में जो भी निर्णय लिया जाएगा वो अमरीकी क़ानूनों के दायरे में रहकर होगा.
स्थिति चिंताजनक
उधर पाकिस्तान की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है. कई विपक्षी नेताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को आपातकाल की घोषणा के बाद से गिरफ्तार किया जा चुका है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ ने स्वीकारा है कि लगभग पाँच सौ लोगों को अभी तक गिरफ़्तार किया जा चुका है.
पाकिस्तान ने अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि देश में जनवरी, 2008 में संभावित आम चुनाव आपातकाल लगाए जाने के बाद भी अपने निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक ही होंगे या नहीं.
उधर पाकिस्तान के कई वकीलों और नागरिक समूहों ने आपातकाल के विरोध में सोमवार को राष्ट्रीय स्तर पर बहिष्कार का आह्नान किया है.
विपक्षी दल, मानवाधिकार संगठन और कई प्रमुख नेता राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के इस क़दम की आलोचना कर रहे हैं.