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रविवार, 04 नवंबर, 2007 को 01:51 GMT तक के समाचार

आमिर अहमद ख़ान
पाकिस्तान संपादक, बीबीसी उर्दू सेवा

आपातकाल से मुशर्रफ़ की मुश्किलें बढ़ेंगी

पाकिस्तान में लोगों का मानना है कि इमरजेंसी लगाकर राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने अपनी मुश्किलें बढ़ा ली हैं.

सेना प्रमुख के तौर पर परवेज़ मुशर्रफ़ का राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही थी.

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ऐसे इशारे मिल रहे थे कि सर्वोच्च न्यायालय का फ़ैसला राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ जा सकता है.

पाकिस्तान का संविधान किसी भी ऐसे आदमी को जो सरकारी नौकरी कर रहा हो उसे राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने की इज़ाज़त नहीं देता. परवेज़ मुशर्रफ़ सेना अध्यक्ष के तौर पर सरकारी नौकरी में हैं.

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने इन मुश्किलों से बचने के लिए देश में इमरजेंसी लगाई. लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि इमरजेंसी से मुशर्रफ़ की राजनीतिक छवि को धक्का पहुंचा और उन्होंने अमरीका जैसे दोस्तों की नाराज़गी भी मोल ले ली है.

अमरीका ने पिछले आठ बरसों में मुशर्रफ़ की बहुत मदद की है.

मुशर्रफ़ की घबराहट

इन सबसे मुशर्रफ़ की घबराहट ही नज़र आती है.

बेनज़ीर भुट्टो की राजनीतिक राह वर्ष 1998-99 की अपेक्षा अब कठिन हो गई है. आज उन्हें धार्मिक चरमपंथियों से ख़तरा है. उन्हें धमकियाँ मिलती रहती हैं.

बेनज़ीर तो बहुत लोकप्रिय हैं लेकिन उनकी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का सांगठनिक ढाँचा ऐसा नहीं है जो सेना और सरकारी मशीनरी से टक्कर ले सके.

पाकिस्तान में इमरजेंसी घोषित करने के बाद परवेज़ मुशर्रफ़ राष्ट्र के नाम संदेश में कुछ महत्वपूर्ण मामलों पर चुप्पी साध गए.

उन्होंने आज से दो-ढाई माह बाद पाकिस्तान में होने वाले चुनावों के बारे में साफ़ तौर से कुछ नहीं कहा.

परवेज़ मुशर्रफ़ इस मुद्दे पर भी कुछ नहीं बोले कि आगामी 14 नवंबर को वो सेना अध्यक्ष का पद छोड़ेंगे या नहीं.

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने इस पर भी कुछ नहीं कहा कि वो राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से रोका हुआ है.

आगे क्या होगा इस बारे में पाकिस्तान में एक जुमला कहा जाता है कि- आगे क्या होगा, यह या तो ख़ुदा जानता है या राष्ट्रपति मुशर्रफ़.