रविवार, 04 नवंबर, 2007 को 14:38 GMT तक के समाचार
सुशील कुमार झा
बीबीसी संवाददाता, बांग्लादेश से
बांग्लादेश दुनिया के उन देशों में से है जहाँ बदलते मौसम का सीधा असर देखा जा सकता है. इसके कई इलाक़े जलवायु परिवर्तन की मार सह रहे हैं.
कई नदियों से घिरे इस देश का आठ प्रतिशत इलाक़ा नदियाँ हैं जो मानसून के समय देश के 35 प्रतिशत हिस्से को घेर लेती हैं.
जलमग्न धरती कैसी दिखती है उसका नज़ारा ढाका में उतरने से पहले हवाई जहाज़ से ही दिख गया. जहाज़ से नीचे दिखता था पानी ही पानी, बीच बीच में घर और छोटी मोटी आबादी.
लेकिन ये सारी तस्वीरें धूमिल हो गईं उस नौका में आकर जो बीबीसी के कई पत्रकारों को लेकर देश के तटीय इलाक़ों में घूम रही थी.
बदलता मौसम
नौका में हमारी जिज्ञासाएं शांत करने के लिए आईपीसीसी यानी जलवायु परिवर्तन पर बनी अंतरसरकारी समिति के बांग्लादेश के प्रतिनिधि अतीक-उर-रहमान भी थे.
उन्होंने जो जानकारी दी वो डरावनी तो थी साथ में आंखे खोलने वाली भी.
आईपीसीसी के अनुमान के मुताबिक 2050 तक बांग्लादेश के अधिकतर इलाक़े जलमग्न होने वाले है.
रहमान कहते हैं, "बांग्लादेश समुद्र तल से काफी नीचे स्तर पर है. हिमालय से नदियां निकलती हैं और यहां तक आती हैं. यहां से पानी के कहीं और जाने का रास्ता नहीं है. पानी यहीं रुक जाता है. अब सोचिए की ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र का स्तर बढ़ता है तो कई इलाके डूब सकते हैं."
कई ऐसे इलाके हैं जो पानी में डूब गए हैं.
रहमान कहते हैं कि ये तो एक समस्या है. बदलते मौसम के कारण समुद्र तल बढ़ेगा तो आने वाले वर्षों में समुद्र का पानी बांग्लादेश में आ जाएगा और पानी खारा हो जाएगा.
कुछ इलाक़ों में अभी भी पानी खारा हो गया है जो पीने लायक नहीं है. रहमान कहते हैं कि ये एक बड़ी समस्या है.