शनिवार, 03 नवंबर, 2007 को 17:17 GMT तक के समाचार
अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा है कि पाकिस्तान में इमरजेंसी लागू किया जाना 'बेहद अफ़सोस की बात' है. ब्रिटेन ने भी इस पर चिंता जताई है.
पश्चिमी देशों की सरकारें पाकिस्तान में चल रही गतिविधियों पर बारीक़ी से नज़र रखे हुए हैं.
कोंडोलीज़ा राइस ने तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में अमरीकी टीवी न्यूज़ चैनल सीएनएन को दिए अपने बयान में आशा जताई कि इमरजेंसी का मक़सद स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना हो सकता है.
उधर ब्रितानी विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड ने कहा है कि वो पाकिस्तान की स्थिति से काफ़ी चिंतित हैं.
आहत है अमरीका
अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता शॉन मैक्कोरमैक ने कहा है कि अमरीका इमरजेंसी लागू किए जाने से 'बहुत आहत' है.
उन्होंने मुशर्रफ़ से अपील की कि वे वर्दी छोड़ने और जनवरी में चुनाव कराने की अपनी प्रतिबद्धता का पालन करें.
उनका कहना था, "अमरीका उन ख़बरों से बेहद आहत है जिनके मुताबिक राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने संविधान के दायरे से बाहर जाकर आपातकाल लागू कर दिया है."
भारत में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई गई.
इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने एक बयान में कहा है, "भारत को उम्मीद है कि स्थिति जल्द सामान्य होगी जिससे पाकिस्तान में स्थिरता क़ायम हो सकेगी और लोकतंत्र फिर आगे बढ़ सकेगा."
भारत के विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा ने भी समाचार एजेंसियों के साथ बातचीत में कहा है कि उन्हें आशा है कि पाकिस्तान में हालात जल्द सामान्य हो जाएँगे.
उधर भारत के प्रमुख राजनीतिक दलों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वाम दलों ने आपातकाल लागू किए जाने की निंदा की है जबकि कांग्रेस ने उम्मीद ज़ाहिर की है कि जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी.
पाकिस्तान में आंतरिक सुरक्षा की स्थिति बहुत ख़राब है. अल क़ायदा समर्थक चरमपंथियों ने पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान में कई आत्मघाती हमले किए इसमें पिछले महीने का हमला भी शामिल है जिसमें 139 लोग मारे गए थे.