शनिवार, 03 नवंबर, 2007 को 08:36 GMT तक के समाचार
राजस्थान में अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने की माँग को लेकर गूजर समुदाय के लोग दिल्ली में एकत्रित हुए हैं.
देश भर से हज़ारों लोग रामलीला मैदान में एकत्रित हुए हैं.
गूजरों ने राज्य सरकार से अपनी माँग दोहराई है कि वह शीघ्र की कोई फ़ैसला करके केंद्र सरकार से गूजरों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की सिफ़ारिश करे.
उल्लेखनीय है कि राजस्थान में मई-जून में गूजरों ने आंदोलन किया था जो हिंसक हो गया था.
इसके बाद सरकार से समझौते के तहत राज्य सरकार ने गूजरों को आरक्षण देने की संभावना पर विचार करने के लिए एक समिति का गठन कर दिया था.
राज्य सरकार ने तीन महीने के भीतर इस समिति की रिपोर्ट आने की बात कही थी लेकिन रिपोर्ट अब तक नहीं आई है और इस समिति का कार्यकाल 15 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दिया गया है.
इसससे नाराज़ गूजरों ने दो अक्तूबर को राजस्थान के पाँच शहरों में गिरफ़्तारियाँ दी थीं.
गूजर समुदाय हज़ारों लोग गिरफ़्तार होकर जेल गए थे. इनमें उनके बड़े नेता शामिल थे.
इसके बाद गूजर अब दिल्ली में रैली कर रहे हैं और उन्होंने राजस्थान और भारत सरकार के सामने पाँच सूत्रीय माँग रखी है.
मामला
राजस्थान में गूजरों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में रखा गया है लेकिन वे अनुसूचित जनजाति के तहत मिलने वाली आरक्षण सुविधा की मांग कर रहे हैं.
इसको लेकर गूजर समुदाय मई-जून में सड़कों पर उतर आया था और उनके आंदोलन ने उग्र रूप धारण कर लिया था.
इस आंदोलन के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों समेत 23 लोगों की जानें गई थीं.
राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में भी गूजर समाज के लोग इस आंदोलन से जुड़ गए थे.
इस दौरान हुए धरने-प्रदर्शनों के कारण सामान्य जनजीवन भी ख़ासा प्रभावित हुआ था.
लगभग दो सप्ताह तक चले उग्र आंदोलन के बाद चार जून को गूजरों नेताओं और राजस्थान सरकार के बीच एक समझौता हो गया था. इसी के तहत चोपड़ा समिति का गठन किया गया था.
इसके बाद गूजर नेताओं पर हत्या जैसे अपराध से लेकर कई मामले दर्ज किए गए हैं.