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बुधवार, 31 अक्तूबर, 2007 को 17:23 GMT तक के समाचार

रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, लखनऊ

यूपी में अपराधों के ख़िलाफ़ विधेयक

उत्तर प्रदेश में मायावती सरकार ने बुधवार को विधानसभा में एक विधेयक पेश किया जिसमें संगठित अपराध को रोकने की व्यवस्था है.

विधेयक का नाम है उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक 2007. संक्षेप में इसे ‘यूपी कोका’ के नाम से जाना जाएगा.

विधेयक पर चर्चा अगले सप्ताह होगी. लेकिन उच्च सदन विधान परिषद् में सरकार अल्पमत में है और वहाँ इसका पारित होना मुश्किल लगता है.

अगर यह विधेयक पास हो जाता है तो यह अनुमोदन के लिए राष्ट्रपति के पास जाएगा.

मुख्यमंत्री मायावती ने एक पत्रकारवार्ता में कहा कि प्रदेश में संगठित अपराध की जड़ें बहुत गहरी हैं और इसे जड़ से समाप्त करने के लिए एक प्रभावी क़ानून लागू करना ज़रूरी है.

विधेयक में भूमाफिया के साथ साथ पेशेवर हत्यारों, फिरौती के लिए अपहरण करने वालों, बंदूक की नोक पर ठेके लेनेवालों, हवाला के माध्यम से देश के आर्थिक ढांचे को नुक़सान पहुँचानेवालों, नकली दावा बनाने वालों, बड़े स्तर पर अवैध शराब बनानेवालों और नशीले पदार्थों की तस्करी करनेवालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की व्यवस्था है.

कड़ी कार्रवाई

इस विधेयक में अपराधियों को सरंक्षण देने और संगठित अपराधियों की संपत्ति रखनेवालों को भी अपराधी मानकर कार्रवाई की जाएगी.

संगठित अपराधियों को सरकारी सुरक्षा देना ग़ैरकानूनी ठहरा दिया गया है.

सरकार का कहना है कि क़ानून का दुरूपयोग रोकने के लिए रिपोर्ट दर्ज करने से पहले आयुक्त और पुलिस उप महानिरीक्षक की लिखित अनुमति ज़रूरी होगी.

जबकि अदालत में चार्जशीट दाखिल करने से पहले पुलिस महानिरीक्षक की अनुमति लेनी होगी.

यूपी कोका के मुक़दमों कि सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित होंगी जो दिन प्रतिदिन सुनवाई करेंगी ताकि मुक़दमों का निबटारा जल्दी हो सके.

इस विधेयक में पाँच लाख रुपए के जुर्माने और उम्र कैद के अलावा फाँसी की सज़ा का भी प्रावधान है.

इस क़ानून के तहत पुलिस को अधिकार होगा कि वह संदिग्ध अपराधी से पूछताछ को ऑडियो विजुअल रिकॉर्ड कर सके.

विपक्ष की आशंका

लेकिन विपक्षी दल इस विधेयक को लेकर आशंकित दिखते हैं.

भाजपा नेता ओमप्रकाश सिंह का कहना था कि क्या भरोसा है कि इस क़ानून का दुरूपयोग नहीं होगा.

उनका कहना था कि भाजपा सरकार ने मौजूदा क़ानूनों से ही अपराध नियंत्रण करके दिखाया था.

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र सिंह चौधरी का कहना है कि यह उनकी पार्टी के लोगों को फंसाने कि सोची समझी रणनीति है.

इस विरोध को देखते हुए इस विधेयक का विधान परिषद में पास होना मुश्किल है.

लेकिन विधेयक गिर गया तो मुख्यमंत्री मायावती इसे विपक्ष के ख़िलाफ़ मुद्दा बना सकती हैं.