http://www.bbcchindi.com

गुजरात दंगे: आठ को उम्रक़ैद

गुजरात में गोधरा के निकट वर्ष 2002 में दंगों के दौरान सात लोगों को ज़िंदा जलाने के दोषी पाए गए आठ लोगों को आजीवन कारावास और तीन लोगों को 3-3 साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई है.

गोधरा की सत्र अदालत ने तीन लोगों को हत्या के अलावा एक महिला से बलात्कार का भी दोषी पाया है.

इन आरोपों में गिरफ़्तार किए गए 40 लोगों में से 29 पर आरोप साबित नहीं हो सका है और उनको अदालत ने बरी कर दिया है.

लेकिन जिस परिवार के सदस्यों को मारा गया था, उसके मुखिया ने बीबीसी से कहा है कि यह सज़ा नाकाफ़ी है और वे इसके ख़िलाफ़ हाईकोर्ट में अपील करेंगे.

सज़ा

स्थानीय पत्रकार अजय उमठ के अनुसार घटना गोधरा के पास कलोल तालुका के ऐरल गाँव की है.

वहाँ 2002 में दो मार्च को एक ही परिवार के सात लोगों को ज़िदा जला दिया गया था. इनमें से पाँच महिलाएँ थीं.

आरोप था कि इनमें से एक महिला के साथ हत्या से पहले सामूहिक बलात्कार भी किया गया था.

पुलिस ने इस मामले में 40 लोगों को गिरफ़्तार किया था.

सुनवाई के बाद गोधरा की अदालत ने इनमें से 29 लोगों को आरोप साबित न हो पाने की वजह से बरी कर दिया है.

शेष 11 में से आठ लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई है और तीन को तीन-तीन साल क़ैद की सज़ा दी गई है.

जिन आठ लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा हुई है उनमें से दो सरकारी कर्मचारी हैं.

ये सभी लोग साढ़े चार साल से जेल में हैं.

असंतुष्ट

शेख़ फ़िरोज़ भाई उस परिवार के मुखिया हैं जिसने अपने सात सदस्यों को दंगे में खो दिया.

उनकी पत्नी, बेटी, भाँजी, माँ-बाप और नाना-नानी को दंगाइयों ने ज़िंदा जला दिया था.

पेशे से ड्राइवर फ़िरोज़ उस समय घर पर नहीं थे इसलिए वे बच गए. उनकी मामी भी इस हमले में बच गईं थीं क्योंकि वे खेतों में काम कर रही थीं.

अदालत के फ़ैसले के बाद बीबीसी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि दोषियों को दी गई सज़ा अपर्याप्त है और कुछ दोषी लोगों को बरी कर दिया गया है.

उन्होंने कहा, "चार लोगों ने बलात्कार किया था और उनमें से एक व्यक्ति को बरी कर दिया गया है."

फ़िरोज़ ने कहा है कि वे इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करने हाईकोर्ट जाएँगे.