बांग्लादेश में एक अदालत ने पूर्व गृहमंत्री लुतफ़ुज़्ज़माँ बाबर को ग़ैरक़ानूनी तरीके से हथियार रखने के जुर्म में दस साल की जेल की सज़ा सुनाई है.
लुतफ़ुज़्ज़माँ बाबर पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के सदस्य हैं और उन्हें बिना लाइसेंस के ही अनेक हथियार रखने का दोषी पाया गया है.
जनवरी 2007 में चुनाव स्थगित किए जाने के बाद सत्ता में आई सैन्य समर्थित अंतरिम सरकार ने कुछ विशेष ट्राइब्यूनल स्थापित किए थे उन्हीं में से एक ने लुतफ़ुज़्ज़माँ बाबर को ग़ैरक़ानूनी तरीके से हथियार रखने का दोषी पाया है.
सरकारी वकील कबीर हुसैन ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, "लुतफ़ुज़्ज़माँ बाबर को ग़ैरक़ानूनी तरीके से रिवॉल्वर और 25 गोलियाँ रखने के आरोप में अलग-अलग दस साल और सात साल की जेल की सज़ा सुनाई गई है."
कबीर हुसैन ने बताया कि ये दोनों सज़ाएँ एक साथ चलेंगी.
इस बीच ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि बीएनपी के कार्यकर्ताओं ने अपनी पार्टी का पुनर्गठन किया है और एक नया कार्यवाहक अध्यक्ष भी बनाया है.
ग़ौरतलब है कि पार्टी की मौजूदा अध्यक्ष ख़ालिदा ज़िया भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में हैं.
गुटबाज़ी
संवाददाताओं का कहना है कि बीएनपी में फिलहाल ख़ालिदा की हैसियत स्पष्ट नहीं है और पार्टी में गुटबाज़ी बढ़ने लगी है.
पार्टी के कुछ लोगों का कहना है कि ख़ालिदा ज़िया को ही समर्थन जारी रखा जाए जबकि एक गुट ऐसा भी है जो पार्टी में एक नया नेतृत्व खड़ा करके उसे पुनर्गठित करने का हिमायती है.
पू्र्व वित्त मंत्री एम सैफ़ुर्रहमान का कहना है कि वह सोमवार को पार्टी के एक बड़ी बैठक के बाद ख़ालिदा ज़िया के स्थान पर अस्थाई तौर पर नेता बन गए हैं.
एक अन्य पूर्व मंत्री और बीएनपी के बाग़ी नेता हफ़ीज़ुद्दीन अहमद को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया है और उन्हें यह स्थान ख़ालिदा ज़िया के समर्थक ख़ांदेकर दिलावर हुसैन की जगह दिया गया है जो बीमार चल रहे हैं.
अलबत्ता ख़ालिदा ज़िया के समर्थकों ने कहा है कि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि पार्टी नेतृत्व में इस तरह से किए गए परिवर्तन ग़ैरक़ानूनी हैं या नहीं.
जनवरी 2007 में वजूद में आई देश की मौजूदा सैन्य समर्थित अंतरिम सरकार का कहना है कि उसने देश में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अभियान चला रखा है और इस अभियान के तहत पिछले क़रीब चार महीनों के दौरान 160 ऐसे नेताओं को दोषी क़रार दिया जा चुका है जिनमें कुछ पूर्व मंत्री भी हैं.
ख़ालिदा ज़िया की राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और अवामी लीग की नेता शेख़ हसीना भी भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में हैं और उन पर सत्ता का दुरुपयोग करने के भी आरोप हैं.