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मंगलवार, 30 अक्तूबर, 2007 को 21:51 GMT तक के समाचार

सुबीर भौमिक
बीबीसी संवाददाता, कोलकाता

चाय बागान मालिकों को चेतावनी

भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम के अधिकारियों ने चाय बागान के प्रबंधकों को चेतावनी दी है कि यदि बागान में काम करनेवाले मज़दूरों की दूषित पानी पर आधारित बीमारियों से मौत होती है तो उन पर हत्या का मामला चलाया जाएगा.

ग़ौरतलब है कि असम में पिछले पाँच महीनों में दूषित जल के कारण लगभग 175 लोगों की मौत हो गई है. इनमें अधिकांश चाय बागानों में काम करनेवाले लोग थे.

राज्य सरकार के आदेश में कहा गया है कि यदि और लोगों की मौत होती है तो भारतीय दंड संविदा के तहत कार्रवाई की जाएगी.

असम के स्वास्थ्य मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि कड़े क़दम इसलिए उठाने पड़े हैं कि क्योंकि चाय बागानों के मालिक मज़दूरों को साफ़ पानी उपलब्ध कराने की कोई व्यवस्था नहीं कर रहे हैं.

उनका कहना था कि सरकार भी अन्य परियोजना के लिए निर्धारित धनराशि में से साफ़ पानी उपलब्ध कराने के लिए ट्यूबवैल लगवा रही है.

विरोध

दूसरी ओर असम के विपक्षी दलों ने सरकार के इस क़दम को नाटक क़रार दिया है और इसे अपने आपको इन मौतों से बचाने की कवायद बताया है.

भारतीय चाय संघ ने सरकार के फ़ैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

उनके प्रवक्ता का कहना था कि सरकार का फ़ैसला 'हास्यास्पद दलील' पर आधारित है.

प्रवक्ता का कहना था कि इस दलील से तो साफ़ पानी उपलब्ध न करा पाने के लिए शहर के मेयर के ख़िलाफ़ भी हत्या का मामला चलाया जा सकता है.

लेकिन स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि उन्होंने और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के अधिकारियों ने प्रभावित इलाक़ों का दौरा किया और पाया कि चाय बागान में हुईं अधिकांश मौतों को टाला जा सकता था.

असम भारत का सबसे बड़ा चाय का उत्पादन करने वाला राज्य है और यहाँ आठ सौ से ज्यादा चाय बागान हैं जिनमें हज़ारों लोग काम करते हैं.